Betul News:मीडिया को टुकड़े डाल ठेकेदार के नौकर समझ रहे हैं बैतूल जिले में पूर्व की तरह चलेगा रेत का कार्य
Betul News बैतूल जिले में पूर्व की तरह नही चलेगा रेत का कार्य
- मीडिया को टुकड़े डाल ठेकेदार के नौकर समझ रहे हैं बैतूल जिले में पूर्व की तरह चलेगा रेत का कार्य

बैतूल रेत खदान को लेकर बैतूल जिले में आदिवासी वर्ग विशेष तौर पर आंदोलन कर रहा है और ठेकेदार को आब प्रमुख इन सब बातों पर प्रशासनिक सहयोग नहीं मिल पाएगा क्योंकि मूल निवासी आदिवासी वर्ग जिसको इस बात की समझ तथा इसका मुख्य उद्देश्य जल जंगल जमीन एवं बैतूल जिले में पैसा एक्ट के अंतर्गत खदानों का आवंटन योग उनका दिया हुआ क्षेत्र पर अर्थात रकबा सीमित होता है और ठेकेदार अवैध खनन करधन अर्जित करता है जिसमें अधिकारियों की मिली भगत स्पष्ट रूप से रहती है इतना ही नहीं खदानों पर वजन हेतु मशीन लगाकर ठेकेदार द्वारा नेक आदि लगाकर अवैध वसूली जैसे कार्य अब नहीं चलेंगे और ना ही बैतूल जिले के सड़कों पर ओवरलोड डंपर या ट्रैक्टर त्र ली द्वारा रेट का परिवहन किया जाएगा सरकार बदलते ही परिवर्तन आना निश्चित है क्योंकि विधानसभा चुनाव के बाद लोकसभा चुनाव है एवं ठेकेदार के अनियमिताओं पर प्रशासन भी कड़क रुक अपनाएगा जिसके कारण अब बैतूल जिले में रेत माफिया का बोलबाला खत्म होगा प्रदेश में सरकार एवं केंद्र सरकार का ध्यान प्रदेश सरकार पर आने के कारण एंबेसी व्यवस्थाएं नहीं चलेगी ठेकेदार की ना बैतूल के खनिज अधिकारी और इंस्पेक्टर की क्योंकि जनता का खून चूसने वाले अधिकारी जो खनिज विभाग और अपनी बाकोती समझ रहा है उनका हिसाब किताब भी अब शीघ्र केंद्र शासन द्वारा किया जाने की संभावना है क्योंकि बैतूल जिले में खनिज विभाग में बैठे कर्मचारियों की आय से अधिक संपत्ति की जन चर्चा चौक चौराहे से लेकर दिल्ली तक पहुंच रही है जन चर्चा है कि बैतूल जिले के ठेकेदार में 10 लख रुपए मीडिया जगत के कुछ नूमाईदो तक पहुंचा दिए परंतु आदिवासी समूह इस विषय को लेकर अति गंभीर है जिसके कारण प्रशासन भी माइनिंग इंस्पेक्टर को छोड़कर गंभीर है उसे प्रमुख बात यह है कि बैतूल जिले के अधिकांश रेत खदान में जो रकबा आवंटित किया गया है उसमें तो माल ही नहीं अन्य स्थानों पर से अब आदिवासियों के सामने से निकलना या अधिकारियों द्वारा निकलवाना बहुत महंगा पड़ सकता है क्योंकि बैतूल जिले का आदिवासी वर्ग हर बात को समझता है और खदानों की जो फोटोग्राफी कराकर अधिकारियों के चेहरे के सामने का नकाब उतार दिया है अब देखना या होगा कि क्या रेत ठेकेदार अपनी मनमानी करेगा या खनिज विभाग के अधिकारी उसे रोकने में कामयाब होंगे
