Betul News: धाकड़ की धाड मंत्री का प्रेम उलझी जांच नहीं हुई कारवाई!

जांच के नाम पर स्वच्छ विभाग मामले को दबाने में लगा!

धाकड़ की धाड मंत्री का प्रेम उलझी जांच नहीं हुई कारवाई!

जांच के नाम पर स्वच्छ विभाग मामले को दबाने में लगा!


बैतूल। बैतूल शहर के सबसे बड़े सरकारी जिला चिकित्सालय में डॉक्टर धाकड़ द्वारा मरीज के परिजन से इलाज के नाम पर₹5000 की रिश्वत मांगी गई थी लेकिन उस गरीब मरीज के पास उतना रूपये नहीं होने के बावजूद बहुत मुश्किल से 1700 रुपए डॉक्टर धाकड़ को दिए गए जिसका स्पष्ट रूप से वीडियो भी बना वीडियो सामने आने के बाद कलेक्टर साहब ने जांच के आदेश तो दे दिए लेकिन क्या यह उचित है अगर जब वीडियो में साफ तौर पर दिख रहा है कि कैसे पैसे लेने के लिए केबिन में लिजाया जाता है उसके बावजूद भी डॉक्टर को इस मामले से बचाने में पूरा स्वास्थ्य विभाग लग गया है ऐसा प्रतीक होता है! क्योंकि कहा जाता है की डॉक्टर का किसी मंत्री के साथ इतना प्रेम है कि उसे प्रेम के आगे अधिकारियों को उसे गरीब मरीज का दर्द भी दिखाई नहीं दे रहा इससे पहले भी जिला चिकित्सालय में लेडी डाक्टर ने ऑपरेशन के नाम पर मरीजों से पैसा ले चुकी है जिसकी शिकवा शिकायत भी हुई लेकिन आज तक उस मामले में क्या कारवाई हुई सामने नहीं आया हां हालांकि उसमें एक नर्स पर जरूर कार्रवाई की गई लेकिन क्या वह नर्स पैसे किसके लिए ले रही थी और क्यों ले रही थी यह एक सोचने का विषय था लेकिन अधिकारियों ने लेडी डाक्टर को छोड़ दिया और जांच के नाम पर लीपापोती कर दी! वैसे भी डॉक्टर धाकड़ आए दिन विवादों में रहते हैं जिसके चलते उसका तबादला भी हो गया था लेकिन किसी नेता के प्रेम ने उन्हें वापस बैतूल भिजवा दिया और बैतूल आकर फिर पहले जैसे मरीज को परेशान कर इलाज के नाम पर पैसा लेने लग गए है मरीज से पैसा लेने का वीडियो स्पष्ट रूप से दिख रहा है तो फिर क्यों तीन डॉक्टर की जांच टीम बनाकर आश्वासन का चेक जनता को दिखाने के लिए ढकोषले कर रहा है स्वास्थ्य विभाग कहीं ऐसा तो नहीं धाकड़ की धार और भाजपा नेता के प्रेम के चलते अधिकारियों को डर लग रहा हो आखिर लगेगा भी क्यों नहीं क्योंकि उन्हें भी अपनी नौकरी बचाना है जनता तो भेड़ बकरियों की तरह है इनका चाहे कुछ हो जाए लेकिन ऐसी में बैठे अधिकारियों की जेब भरनी चाहिए वैसे भी बैतूल एक आदिवासी समाज ज्यादा होने के चलते यहां कोई कुछ कहता नहीं और नहीं कोई आवाज उठाता है इसलिए तो यहां पर अधिकारियों की बल्ले बल्ले रहती हैं इसलिए कोई भी आधिकारिक बैतूल छोड़कर जाना नहीं चाहता अगर जो चला गया वह भी अपने अपने हिसाब से जुगाड़ कर कर बैतूल वापस आ जाता है ताकी बैतूल की जनता को लूट सके और अपनी जेब भर सके यह बैतूल में हर किसी को लूटने का मौका मिल जाता है!

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