Betul News:बैतूल में भ्रष्टाचार और बेरोजगारी की मार: 3 करोड़ की सड़कों की गुणवत्ता पर सवाल, अतिक्रमण के नाम पर बेरोजगार हुआ युवा वर्ग

अतिक्रमण के नाम पर बेरोजगार हुआ युवा वर्ग

बैतूल में भ्रष्टाचार और बेरोजगारी की मार: 3 करोड़ की सड़कों की गुणवत्ता पर सवाल,

अतिक्रमण के नाम पर बेरोजगार हुआ युवा वर्ग

बैतूल शहर में जहां विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं इन दावों की वास्तविकता कुछ और ही कहानी बयां करती है। भाजपा सरकार के पांच विधायक और एक केंद्रीय मंत्री बैतूल जिले को मिले हैं, लेकिन विकास के नाम पर किए जा रहे कामों की गुणवत्ता पर कोई खास ध्यान नहीं दिया जा रहा। हाल ही में 3 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई सड़कों की स्थिति कुछ ही समय बाद खराब हो गई, और ये सड़कें तिनके की तरह बिखर गईं। इससे लोगों को न केवल असुविधा हो रही है, बल्कि यह भी स्पष्ट हो गया है कि सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार हुआ है।सड़कों की स्थिति खराब होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं। ना तो सड़कों का मरम्मत कार्य किया जा रहा है और ना ही ठेकेदारों पर किसी प्रकार की कार्रवाई हो रही है। सूत्रों के अनुसार, ठेकेदार ने अपने बचाव के लिए संबंधित अधिकारियों तक रिश्वत पहुंचा दी है, जिससे किसी भी तरह की जांच या दंडात्मक कार्रवाई से बचा जा सके। जनता के बीच यह चर्चा है कि उनके वोटों की कीमत केवल इन भारी लिफाफों के वजन से तय की जा रही है।

युवा वर्ग और गरीब तबके को बेरोजगार किया अतिक्रमण के नाम पर

दूसरी ओर, बैतूल में अतिक्रमण हटाने की मुहिम में गरीब और युवा वर्ग के लोगों की रोजी-रोटी छिन ली गई है। सड़क किनारे छोटी-छोटी दुकानें और हाथ ठेले संचालित करने वाले युवाओं को अतिक्रमण के नाम पर हटाया जा रहा है। इन युवाओं के लिए ये दुकानें ही उनके जीवनयापन का साधन थीं, जिससे उनके परिवार का भरण-पोषण होता था।लेकिन, बड़े व्यापारियों के अतिक्रमण को नज़रअंदाज किया जा रहा है। कोठी बाजार और गंज क्षेत्र में बड़े व्यापारी अपनी दुकानों के आगे तक सामान फैलाए रहते हैं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। वहीं, कॉलेज चौक और अस्पताल के सामने छोटी दुकानों और ठेले वालों पर हर 15-20 दिन में अतिक्रमण की कार्रवाई कर उन्हें रोजगार से वंचित कर दिया जाता है।युवाओं और गरीब वर्ग का आरोप है कि जनप्रतिनिधि और अधिकारी बड़े व्यापारियों से प्रभावित हैं और उनकी राजनीति में पकड़ के चलते उन पर अतिक्रमण की कार्रवाई नहीं की जाती। वहीं, गरीबों को उनके रोजमर्रा के रोजगार से बेदखल किया जा रहा है, और उन्हें किसी वैकल्पिक जगह पर बसाने की कोई योजना भी नहीं बनाई गई है।इस दोहरे मापदंड ने बैतूल के विकास और जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.