Shivratri:दुर्लभ संयोग में महाशिवरात्रि आज, महादेव की विशेष कृपा पाने के लिए इस विधि से करें पूजा

दुर्लभ संयोग में महाशिवरात्रि आज, महादेव की विशेष कृपा पाने के लिए इस विधि से करें पूजा

बैतूल।महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का प्रमुख त्योहार है, जो देवों के देव महादेव की पूजा को समर्पित है। यह पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर मनाया जाता है। पुराणों के मुताबिक फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी पर भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह हुआ था, इसलिए इस तिथि पर महाशिवरात्रि का महापर्व मनाया जाता है। इस दिन मुख्य रूप से शिव संग पार्वती की आराधना की जाती है और शिवालयों में जाकर शिवलिंग का जलाभिषेक करने की परंपरा है। महाशिवरात्रि पर्व पर आज के दिन यानि बुधवार को कई योगों के साथ ही आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। वर्ष 1873 के बाद सूर्य, बुध और शनि एक साथ कुंभ राशि में रहेंगे। तब भी महाशिवरात्रि बुधवार ऐसे में व्रत, जलाभिषेक और महामृत्युंजय जाप करने से आध्यात्मिक, धार्मिक उन्नति को बढ़ावा मिलेगा। अनेक गांव व शहरों में भक्त द्वारा प्रयागराज से मंगाए महाकुंभ के जल से भोलेनाथ का अभिषेक करेंगे। जिले के बालाजीपुरम, सोनाघाटी, भोपाली, सालबाड़ी, गुफा सहित अनेक जगह आज के दिन मेले भरेंगे। छोटा भोपाली में पूजा करने बड़ी संख्या में भक्त आएंगे। पंडित मिश्रा ने बताया कि महशिवरात्रि पर शुक्र अपनी उच्च राशि मीन में रहेंगे। जिससे मालव्य राजयोग बनेगा। राहु भी मीन राशि में रहेंगे, जिससे शुक्र-राहु की युति बनेगी। कुंभ राशि में सूर्य और शनि का मिलन होगा, जो शनि की मूल त्रिकोण राशि मानी जाती है। इसके अलावा सूर्य-बुध की युति से बुधादित्य योग बनेगा, जो पराक्रम और प्रतिष्ठा में वृद्धि करेगा। शश योग बनने से श्रद्धालुओं को आर्थिक व सामाजिक लाभ के आसार हैं।शिव चतुर्दशी तिथि मिश्रा ने बताया कि महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। जो बुधवार को सुबह 11 बजकर 6 मिनट से पूरे दिन रात रहेगी। महाशिवरात्रि पर चतुर्दशी तिथि प्रदोष व्यापिनी के साथ रात्रि निशीथ काल में रहनी चाहिए जो इस बार पूरे दिन रात रहेगी।
भोले के भक्त रखेंगे उपवास
भोले के भक्त रखेंगे उपवास महाशिवरात्रि के दिन भोले के भक्त दिनभर उपवास रखेंगे। सुबह से लेकर शाम तक भगवान आशुतोष का दुग्धाभिषेक, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक किया जाएगा। शिवजी को पंचामृत से नहलाकर गंगाजल अर्पण किया जाएगा। धतूरा आक के पुष्प, गाजर बिल्वपत्र आदि चढ़कर भगवान का श्रृंगार किया जाएगा। महाशिवरात्रि के दिन भगवान का पंचाक्षर मंत्र ॐ नमः शिवाय का विशेष रूप से जाप किया जाएगा। अनेक जगह मंगलवार को जागरण हुए। कई जगह बुधवार को भी जागरण होंगे। झांकियां सजाई जाएगी।
4 प्रहर का पूजन समय
प्रथम प्रहर- सायंकाल 6:22 से रात्रि 9:30 बजे तक
द्वितीय प्रहर- रात्रि 9:31 से रात्रि 12:39 बजे तक
तृतीय प्रहर- मध्यरात्रि 12:40 से 3:48 बजे तक
चतुर्थ प्रहर- मध्यरात्रि बाद 3:49 से प्रातः 6:57 बजे तक
निशीथ काल – मध्यरात्रि 12:15 से 1:05 बजे तक।
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