Betul News:बैतूल में अधिकारियों का पक्षपात: पैड पत्रकारों को प्राथमिकता, अन्य की अनदेखी
बैतूल में अधिकारियों का पक्षपात: पैड पत्रकारों को प्राथमिकता, अन्य की अनदेखी

बैतूल जिले में प्रशासनिक अधिकारियों के रवैये को लेकर एक गंभीर मुद्दा सामने आया है। आरोप है कि जिले के अधिकांश अधिकारी केवल अपने चुनिंदा “पैड पत्रकारों” के प्रति ही संवेदनशील रहते हैं, जबकि अन्य पत्रकारों की लगातार उपेक्षा की जा रही है। यह स्थिति न सिर्फ पत्रकारिता के निष्पक्ष स्वरूप को प्रभावित कर रही है, बल्कि सूचना के समान वितरण पर भी सवाल उठा रही है।पैड पत्रकारों को विशेष तरजीहसूत्रों के मुताबिक, जिले के कई अधिकारी अपने चहेते पत्रकारों के फोन कॉल्स को तुरंत रिसीव करते हैं। इतना ही नहीं, किसी भी महत्वपूर्ण मामले की जानकारी सबसे पहले इन्हीं पत्रकारों को दी जाती है। रात के समय भी इन चुनिंदा पत्रकारों को घर बुलाकर विशेष बाइट्स या इंटरव्यू दिए जाते हैं। यह व्यवहार अधिकारियों और कुछ पत्रकारों के बीच एक खास रिश्ते की ओर इशारा करता है, जिसे स्थानीय लोग “पैड पत्रकारिता” का नाम दे रहे हैं।अन्य पत्रकारों की अनदेखी वहीं, अगर कोई अन्य पत्रकार दिन के समय अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश करता है, तो उसे निराशा ही हाथ लगती है। कई पत्रकारों का कहना है कि चाहे कितनी जरूरी खबर हो, अधिकारी उनके फोन कॉल्स का जवाब नहीं देते। एक पत्रकार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हम दिनभर कोशिश करते हैं, लेकिन अधिकारी या तो फोन नहीं उठाते या फिर व्यस्त होने का बहाना बनाते हैं। लेकिन रात होते ही उनके खास पत्रकारों के लिए समय निकल आता है।यह दोहरा रवैया पत्रकारों के बीच असंतोष को जन्म दे रहा है।पत्रकारिता पर असर इस पक्षपातपूर्ण व्यवहार का असर जिले की पत्रकारिता पर साफ दिखाई दे रहा है। जो पत्रकार अधिकारियों के करीब नहीं हैं, उन्हें खबरों के लिए संघर्ष करना पड़ता है। इससे निष्पक्ष और स्वतंत्र पत्रकारिता कमजोर हो रही है, क्योंकि जानकारी का प्रवाह केवल कुछ गिने-चुने लोगों तक सीमित रह जाता है। एक वरिष्ठ पत्रकार ने कहा, “यह लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, लेकिन अगर अधिकारी इस तरह भेदभाव करेंगे, तो जनता तक सही जानकारी कैसे पहुंचेगी?अधिकारियों का मौन इस मामले में जब कुछ अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। यह स्थिति और भी संदेह पैदा करती है कि क्या वाकई में जिले में एक खास पत्रकार-अधिकारी गठजोड़ काम कर रहा है। कुछ लोगों का मानना है कि यह व्यवहार न सिर्फ अनैतिक है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता के खिलाफ भी है।
