Betul News:फुले फिल्म से मिल रही भारत के सच्चे इतिहास की जानकारी: सुधाकर पवार

बैतूल की आवाज समाचार पत्र के संपादक आर डी पाटील ने लोगों के संयोग से 2000/ से अधिक लोगों को दिखाई निशुल्क फुले फिल्म 

फुले फिल्म से मिल रही भारत के सच्चे इतिहास की जानकारी: सुधाकर पवार

बैतूल की आवाज समाचार पत्र के संपादक आर डी पाटील ने लोगों के संयोग से 2000/ से अधिक लोगों को दिखाई निशुल्क फुले फिल्म 

बैतूल। सामाजिक चेतना और बदलाव का संदेश देने वाली ऐतिहासिक फिल्म फूले को देखने के लिए रविवार, 25 मई को कांतिशिवा टॉकीज में एक बार फिर विशेष निशुल्क शो आयोजित किया गया। दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक चले इस शो में दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ी। शो की शुरुआत संविधान की उद्देशिका वाचन और शपथ ग्रहण से की गई, जिसका वाचन महेंद्र खोबरागड़े ने किया।

फिल्म को देखने के लिए भाजपा जिला अध्यक्ष सुधाकर पवार, नगर पालिका परिषद बैतूल की अध्यक्ष पार्वतीबाई बारस्कर, वरिष्ठ भाजपा नेता अतीत पवार, वार्ड पार्षद और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक पहुंचे। सुधाकर पवार ने फिल्म देखकर कहा कि प्रत्येक नागरिक को यह फिल्म जरूर देखनी चाहिए क्योंकि इससे भारत के सच्चे इतिहास की जानकारी मिलती है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार ज्योतिबा फूले और सावित्रीबाई फूले ने शिक्षा की मशाल जलाई, उसी का परिणाम है कि आज बेटियां उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। नगर पालिका अध्यक्ष पार्वतीबाई बारस्कर ने कहा कि यह फिल्म काफी प्रेरणादायी है और महिलाओं को अवश्य देखनी चाहिए। यह समाज में बेटियों को सशक्त बनाने का सकारात्मक संदेश देती है। दर्शकों की मांग और उत्साह को देखते हुए अब तक फूले फिल्म के छह निशुल्क शो आयोजित किए जा चुके हैं, जिसमें 2000 से अधिक लोगों ने भाग लिया। इस आयोजन को सफल बनाने में महार समाज संगठन जिला बैतूल, जनकल्याण सेवा समिति, डॉ. बीआर अंबेडकर कॉलेज, रामनाथ चौकीकर, रामदास पाटील, मोहन जोंजारे, महेंद्र खोबरागड़े, महेश तुकाराम लोखंडे, गुलाबराव जोंजारे, योगेंद्र दवंडे, सूरजलाल मंडलेकर, सीताराम पाटिल, कौशी मालवी, वंदना झरबड़े, दिनेश भावरकर, सतीश भूमरकर, कमलेश मासोदकर का महत्वपूर्ण योगदान रहा। रामदास पाटील ने जानकारी दी कि पिछले शो में दर्शकों की संख्या और उत्साह अत्यंत सराहनीय था, इसी कारण रविवार को फिर से फिल्म का विशेष शो रखा गया। उन्होंने बताया कि यह फिल्म समाज में फैली कुरीतियों, महिलाओं की शिक्षा, पुनर्विवाह, स्वतंत्रता, समानता और उनके अधिकारों को लेकर ऐतिहासिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। इस आयोजन को सफल बनाने में रामदास पाटील, बुद्ध भूमि और प्रज्ञा बौद्ध विहार के संचालक, धनराव चंदेलकर, अमित सातनकर, योगेंद्र दवंडे, गुलबराव जोंजारे, सूरज मंडलेकर, शिव पाटिल एडवोकेट, सुखराम पंडाग्रे एडवोकेट, महेंद्र खोबरागड़े, कल्पना पवार, सीता आहके, हेमवती भलावी, मोहन जोंजारे, महेश साहू, राहुल नागले, नितिन अग्रवाल, रामा अतुलकर का सराहनीय योगदान रहा।

फिल्म देखने के बाद भ्रांतियां हुई दूर

महेंद्र खोबरागड़े ने बताया कि फिल्म देखने के बाद दर्शकों के मन में यह स्पष्ट हुआ कि फुले फिल्म को लेकर समाज में कई भ्रांतियां फैली थीं। अधिकांश लोग यह मानते थे कि फुले दलित समुदाय से था, जबकि वास्तव में वे ओबीसी वर्ग से थे। समाज को यह जानकारी नहीं थी कि भारत की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले ही थीं, जिन्होंने नारी शिक्षा की नींव रखी और समाज में फैली कुरीतियों के विरुद्ध अपने पति महात्मा ज्योतिबा फुले के साथ मिलकर निर्णायक संघर्ष किया। उन्होंने महिलाओं को शिक्षा का अधिकार दिलाया, विधवा विवाह प्रथा शुरू की, जल के समान अधिकार की लड़ाई लड़ी और अपने पति की चिता को अग्नि देने वाली पहली महिला बनीं। उनके इन कार्यों से समाज में नारी समानता और स्वाभिमान की एक नई क्रांति का आरंभ हुआ। फिल्म में यह भी बताया गया कि मुस्लिम समाज की पहली शिक्षिका शेख फातिमा ने भी सावित्रीबाई फुले के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया।

फुले दंपति के कारण ही आज मातृशक्ति जाग्रत होकर शिक्षित हो पाई

धनराव चंदेल ने बताया कि विषम समय व विषम परिस्थितियों में भी मानवीयता की मिसाल पेश करने वाले प्रथम ऐसे महापुरुष थे, जिन्होंने मानवीय धम्म को सर्वोपरि स्थान देकर संपूर्ण मानव समाज में जागृति लाने का प्रयास किया। फुले दंपति के कारण ही आज मातृशक्ति जाग्रत होकर शिक्षित हो पाई। हम सब पूज्य फुले जी को सादर नमन-वंदन कर फिल्म निर्माता को सादर साधुवाद ज्ञापित करते हैं। फिल्म के समस्त कलाकारों को भी नमन-वंदन। सभी बंधु-बांधवों, माता-बहनों से विनम्र अनुरोध है कि वास्तविकता को जानने हेतु यह फिल्म जरूर देखें।

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