Review 12th Fail : संघर्ष और सफलता की कहानी*
*12TH FAIL : एक प्रेरणादायक कहानी, कुछ कमजोरियों के साथ*
*12th Fail : संघर्ष और सफलता की कहानी*
कहानी कैसी है? By Kartik Trivedi
बैतूल। आज हम बात करेंगे विधु विनोद चोपड़ा के बैनर में बनी हिन्दी फीचर फिल्म “12वीं फेल” की जो एक प्रेरणादायक कहानी है , फिल्म 27 अक्टूबर 2023 को रिलीज़ हुई थी , यह फिल्म 2 घंटे 26 मिनट की है और अभी यह फिल्म DISNEY + HOTSTAR OTT पर है वहा इसे देख सकते है।
12th Fail एक जीवनी पर आधारित फिल्म है, जिसका निर्माण, लेखन और निर्देशन विधु विनोद चोपड़ा द्वारा किया है । यह अनुराग पाठक की 2019 की “अनाम नॉन-फिक्शन” किताब पर आधारित है, जो मनोज कुमार शर्मा की वास्तविक जीवन की कहानी है, जो अत्यधिक गरीबी से उठ कर भारतीय पुलिस अधिकारी बने।
फिल्म में मेधा शंकर , अनंत वी जोशी , अंशुमान पुष्कर और प्रियांशु चटर्जी के साथ विक्रांत मैसी मुख्य भूमिका में है।
12TH FAIL एक ऐसे लड़के के संघर्षों को दर्शाती है, फिल्म की कहानी मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव से शुरू होती है। यहां रहने वाला मनोज कुमार शर्मा (विक्रांत मैसी) एक मेहनती और बुद्धिमान लड़का है, लेकिन वह पढ़ाई में बहुत अच्छा नहीं है। बारहवीं कक्षा की परीक्षा में वह फेल हो जाता है और फिर उसे एक ईमानदार पुलिस अधिकारी मिलता है, जो उसे बिना चीटिंग पास होने के लिए प्रेरित करता है, फिर जब वह दुबारा 12TH के एग्जाम देने जाता है , तो सारे बच्चे चीटिंग करते है , लेकिन मनोज को उस पुलिस अधिकारी की बात दिल पर लग जाती है तो वह बिना किसी चीटिंग के परीक्षा देता है और 3RD डिवीजन से 12वी पास हो जाता है , फिर BA करके ग्वालियर DSP बनने चला जाता है, जहा उसे बहुत सी मुसीबतो का सामना करना पड़ता है, लेकिन वह हार नहीं मानता , फिर उसे वहा जाकर पता चलता है कि DSP की भर्ती सरकार ने आने वाले 3 सालो के लिए रद्द करदी है , फिर उसे वहा एक लड़का मिलता है जो खुद एक PSC एस्पीरेंट था, वो उसे UPSE के बारे में बताता है और फिर वह उस मित्र पांडे के साथ दिल्ली चला जाता है और IPS अधिकारी बनने का सपना देखता है। इसके बाद वह अपने सपने को पूरा करने के लिए संघर्ष शुरू कर देता है। मनोज को पता चलता है कि UPSC परीक्षा पास करना उसके लिए बहुत मुश्किल होगा। लेकिन वह हिम्मत नहीं हारता और कड़ी मेहनत करना जारी रखता है। वह कई बार असफल होता है, लेकिन हर बार फिर से उठ खड़ा होता है। आखिरकार, वह अपने सपने को पूरा करने में सफल हो जाता है और IPS अधिकारी बनता है।
“12वीं फेल” एक अच्छी तरह से बनाई गई फिल्म है। फिल्म की पटकथा मजबूत है और निर्देशन भी अच्छा है। फिल्म के कलाकारों ने भी अपने-अपने किरदारों को अच्छी तरह से निभाया है।फिल्म में विक्रांत मैसी ने अपने अभिनय से सभी को प्रभावित किया है साथ ही फिल्म की सबसे बड़ी ताकत विक्रांत मैसी का अभिनय है। उन्होंने मनोज कुमार शर्मा के किरदार को पूरी ईमानदारी और लगन से निभाया है। उनके अभिनय से दर्शकों को मनोज के संघर्षों और सफलता की कहानी बहुत करीब से महसूस होती है।
फिल्म की अन्य प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
फिल्म की कहानी बहुत प्रेरणादायक है। यह हमें यह सिखाती है कि सपनों को पूरा करने के लिए कभी हार नहीं माननी चाहिए।
फिल्म में कई महत्वपूर्ण संदेश दिए गए हैं। जैसे कि शिक्षा का महत्व, कड़ी मेहनत का महत्व और दृढ़ संकल्प का महत्व।
* फिल्म दिखाती है कि शिक्षा प्रणाली गरीब और ग्रामीण छात्रों के लिए कितनी कठिन है। हालांकि, यह शिक्षा प्रणाली के कुछ सकारात्मक पहलुओं को भी दिखाती है, जैसे कि Manoj के शिक्षकों और दोस्तों का समर्थन।
* फिल्म का संगीत बहुत अच्छा है। यह फिल्म के माहौल को और भी बेहतर बनाता है।
फिल्म के कुछ नकारात्मक बिंदु:
* नाटकीयता: फिल्म कुछ जगहों पर थोड़ी नाटकीय लगती है। उदाहरण के लिए, Manoj का अपने परिवार और दोस्तों के साथ संघर्ष अक्सर अतिरंजित होता है। चरित्र विकास की कमी: फिल्म में कुछ चरित्र विकास की कमी है। उदाहरण के लिए, Manoj की मां का चरित्र केवल एक सहायक चरित्र के रूप में कार्य करता है। उसके अपने कोई लक्ष्य या सपने नहीं हैं।
रोमांटिक उप-कथा: फिल्म में एक रोमांटिक उप-कथा है जो फिल्म के मुख्य कथानक से थोड़ी हटकर है। यह उप-कथा कभी-कभी फिल्म की गति को बाधित करती है।
फिल्म का अंतिम निष्कर्ष
फिल्म की कहानी बहुत ही प्रेरणादायक है। यह हमें यह सिखाती है कि सपनों को पूरा करने के लिए कभी हार नहीं माननी चाहिए। मनोज कुमार शर्मा का किरदार बहुत ही प्रेरणादायक है। वह एक ऐसा लड़का है जो अपने सपने को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करता है और अंत में सफल हो जाता है। कुल मिलाकर, “12th Fail” एक अच्छी फिल्म है जो दर्शकों को प्रेरित कर सकती है। हालांकि, फिल्म में कुछ कमजोरियां भी हैं। सबसे पहले, फिल्म का अंत कुछ हद तक अप्रत्याशित है। दूसरा, फिल्म कुछ जगहों पर थोड़ी नाटकीय लगती है। तीसरा, फिल्म में कुछ चरित्र विकास की कमी है। यह फिल्म उन सभी युवाओं के लिए एक प्रेरणा है जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह उन्हें बताती है कि अगर वे कड़ी मेहनत से ही सफलता प्राप्त होती हैं।
*BY : KARTIK TRIVEDI (NATIONAL AWARD WINNER SHORT FILM DIRECTOR)*
