Betul News:रिश्वत दो, फिर पंप खोलो!झल्लार में अधिकारी का ‘सील एंड डील कांड, कैमरे में कैद हुआ!
रिश्वत दो, फिर पंप खोलो!झल्लार में अधिकारी का ‘सील एंड डील’ कांड, कैमरे में कैद हुआ!

बैतूल।झल्लार के रुद्रानी किसान सेवा केंद्र पेट्रोल पंप से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने जिले की प्रशासनिक व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि भैंसदेही के कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी धर्मदास ने जांच की आड़ में पहले पंप को सील किया, फिर 50 हजार रुपये की रिश्वत लेकर उसे दोबारा खुलवाया। यह पूरी घटना पंप पर लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो चुकी है।पंप डीलर नयन कुमार आर्य ने कलेक्टर को सौंपे गए शिकायत पत्र में इस पूरे घटनाक्रम की वीडियो फुटेज, दस्तावेजी प्रमाण और जांच रिपोर्टों के साथ विस्तृत जानकारी दी है, और दोषी अधिकारी पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।डीलर का कहना है कि 29 जुलाई 2025 को दोपहर 1 बजे कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी धर्मदास अकेले ही जांच के नाम पर उनके पेट्रोल पंप पर पहुंचे और बिना संयुक्त टीम, बिना सेल्स ऑफिसर, नापतौल या राजस्व विभाग की उपस्थिति के तत्काल बिक्री रोकने का मौखिक आदेश दिया। पंप मैनेजर प्रदीप चंदेल द्वारा जांच में पूरा सहयोग दिया गया, परंतु अधिकारी ने 2:45 बजे पंचनामा बनाकर पंप को सील कर दिया।
जांच के नाम पर नियमों की उड़ाई धज्जियां!
खास बात यह है कि बारिश के समय छाते और प्लास्टिक की पन्नियों के सहारे टैंकों की जांच की गई, जो कि आईओसी की मार्केटिंग डिसिप्लिन गाइडलाइन के मुताबिक पूरी तरह से अनुचित और अवैज्ञानिक है। जांच दल को सभी वैध दस्तावेज स्टॉक रजिस्टर, घनत्व रजिस्टर, नापतौल प्रमाणपत्र, एक्सप्लोसिव लाइसेंस, अग्निशमन प्रमाणपत्र दिए गए, नोजल से पेट्रोल और डीजल की मात्रा की कोनिकल माप जांच की गई, दोनों सही पाए गए, फिर भी अधिकारी ने पंप को सील कर दिया।
आईओसी की जांच रिपोर्ट में सब कुछ सही, फिर भी रिश्वत के बिना नहीं खुला पंप
30 जुलाई को आईओसी वेंडर की टेक्निकल टीम ने टैंक की गहराई से जांच की। रिपोर्ट में टैंक में पानी की मात्रा टोलरेंस लिमिट के भीतर पाई गई। रिपोर्ट उसी दिन विभाग को सौंप दी गई, बावजूद इसके अधिकारी द्वारा जानबूझकर पंप को डी सील नहीं किया गया। उल्टा, सूत्रों के अनुसार डीलर पर रिश्वत देने का दबाव बनाया गया। बदनामी और सामाजिक दबाव से मजबूर होकर अंततः डीलर ने 50 हजार रुपये की रिश्वत दी, तब 1 अगस्त को दोपहर 1 बजे पंचों के समक्ष जांच कर पंप को डीसील किया गया। इस लेनदेन की पूरी गतिविधि सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई डीलर नयन कुमार आर्य ने जिला कलेक्टर को सौंपे गए शिकायती पत्र में पूरी घटना का ब्यौरा देते हुए सीसीटीवी फुटेज और दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग किया। सोशल मीडिया और जिला कलेक्टर के फेसबुक पेज पर भी 29 जुलाई को ही पंप सील होने की खबर प्रसारित कर उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस गंभीर भ्रष्टाचार और प्रमाणिक वीडियो फुटेज के सामने आने के बाद क्या कदम उठाता है। दोषी अधिकारी पर कार्रवाई होगी या फिर सिस्टम की चुप्पी एक बार फिर रिश्वतखोरी को संरक्षण देगी।
