Betul News:मलकापुर में रेत का खुला खेल रिंकू का नाम चर्चा में प्रशासन की आंखों पर पट्टी?

मलकापुर में रेत का खुला खेल रिंकू का नाम चर्चा में प्रशासन की आंखों पर पट्टी?

बैतूल। मलकापुर क्षेत्र इन दिनों एक अजीब विडंबना का उदाहरण बनता जा रहा है। सड़कों पर रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली दिनदहाड़े दौड़ते दिखाई दे रहे हैं। गांव के लोग देख रहे हैं, राहगीर देख रहे हैं, लेकिन जिनकी जिम्मेदारी है, शायद उनकी नजर अभी उस दिशा में पहुंची ही नहीं।कहते हैं कानून की आंखें बहुत तेज होती हैं, मगर मलकापुर में मानो उस तेज नजर पर किसी ने पर्दा डाल दिया हो। सवाल सीधा है अगर अवैध रेत परिवहन नहीं हो रहा, तो फिर सड़कों पर दौड़ते ये ट्रैक्टर आखिर किस खजाने से भरे हैं? और अगर हो रहा है, तो कार्रवाई की रफ्तार इतनी धीमी क्यों है कि जो मलकापुर तक पहुंच ही नहीं पा रही? सूत्रों से मिली जानकारी में रिंकू  नाम युवक का साम्राज्य एक तरफ है। लोगों के बीच चर्चा है कि रेत के इस पूरे खेल के पीछे इसी नाम के आसपास एक नेटवर्क काम कर रहा है। हालांकि यह चर्चा कितनी सच्चाई लिए हुए है और कितनी अफवाह इसका स्पष्ट जवाब तो प्रशासन की जांच से ही सामने आ सकता है। लेकिन जब सवाल उठते हैं और जवाब नहीं आते, तब चर्चाएं ही सच का रूप लेने लगती हैं।जिले में अवैध रेत परिवहन की कहानी नई नहीं है। कभी ट्रैक्टर जब्त होने की खबर आती है, कभी डंपर पकड़ने की तस्वीरें जारी होती हैं। लेकिन कुछ दिनों बाद वही रास्ते, वही ट्रैक्टर और वही रफ्तार फिर नजर आने लगती है। इससे लोगों के बीच यह धारणा बनती जा रही है कि कार्रवाई कम और औपचारिकता ज्यादा हो रही है।मलकापुर का मामला केवल रेत की ढुलाई का नहीं, बल्कि प्रशासनिक सक्रियता की परीक्षा भी है। खनिज विभाग, राजस्व अमला और पुलिस तीनों के पास अधिकार भी हैं और जिम्मेदारी भी। सवाल यह है कि क्या ये जिम्मेदारी जमीन पर दिखाई देगी या फाइलों के पन्नों में ही सिमट कर रह जाएगी? क्योकि रेत सिर्फ खनिज नहीं, नदियों की सांस है। जब इसे नियमों को ताक पर रखकर निकाला जाता है, तो नदी कमजोर होती है, पर्यावरण पर असर पड़ता है और आने वाले समय में इसका खामियाजा पूरे समाज को भुगतना पड़ता है।अब निगाहें इस बात पर हैं कि मलकापुर की रेत पर उठते सवालों का जवाब प्रशासन देता है या यह मामला भी चर्चाओं के शोर में दब कर रह जाता है। वैसे तो तस्वीर यही कह रही है रेत के ट्रैक्टर सबको दिखाई दे रहे हैं, बस कार्रवाई अभी भी रास्ता तलाश रही है।

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