Politics News:न राहुल न खरगे न सोनिया न चौधरी चलेगी सिर्फ कमलनाथ की
कमलनाथ के लोग नहीं होगे अनाथ इंदौर से विंध्य प्रदेश व महाकौशल तक केवल कमलनाथ
न राहुल न खरगे न सोनिया न चौधरी चलेगी सिर्फ कमलनाथ की!
कमलनाथ के लोग नहीं होगे अनाथ
इंदौर से विंध्य प्रदेश व महाकौशल तक केवल कमलनाथ

प्रदेश की राजनीति में इन दिनों कांग्रेस का संगठन सृजन अभियान चर्चा में है, लेकिन असल में चर्चा का कारण अभियान से ज्यादा उसके पीछे की रणनीति बन गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने इस पूरी कवायद को अपने अंदाज में इस तरह मोड़ा कि अब यह पार्टी का नहीं, बल्कि कमलनाथ का अभियान बनकर रह गया है। राहुल गांधी, सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के नाम मंचों पर सिर्फ औपचारिकताओं में लिए गए, असल कमान हर जिले में नाथ के हाथ में ही रही।
इंदौर संभाग, महाकौशल, नर्मदापुरम और विंध्य के जिलों में संगठन सृजन का नारा लगा जरूर, लेकिन वहां की हकीकत यह रही कि कमलनाथ के नाम के आगे कोई दूसरा चेहरा न दिखा, न सुना। इंदौर, सिवनी, बैतूल, नर्मदापुरम ,कटनी, अनूपपुर, मंडला, डिंडोरी, नरसिंहपुर बालाघाट से लेकर पन्ना टीकमगढ़ तक में यह अभियान नाथ का ‘शक्ति प्रदर्शन’ साबित हुआ। यहां जिला इकाइयों से लेकर ब्लॉक स्तर तक, हर नियुक्ति, हर पद, हर घोषणा में ‘नाथ फैक्टर’ ही हावी रहा।राजनीतिक समीक्षकों का कहना है कि कमलनाथ ने संगठन सृजन को एक तरह से अपने ‘वर्चस्व सृजन’ में बदल दिया। पार्टी के भीतर जो भी समूह अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रहे थे, उन्हें इस अभियान की भीड़ में चुपचाप किनारे कर दिया गया। नतीजा यह कि संगठन के भीतर लोकतांत्रिक प्रक्रिया से ज्यादा ‘नाथ ब्रांड’ की सील-मोहर पर भरोसा किया गया।प्रदेश कांग्रेस में यह पहली बार नहीं है जब कमलनाथ का दबदबा इतने खुले तौर पर सामने आया हो, लेकिन इस बार फर्क यह है कि केंद्र में राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठने के बीच प्रदेश में किसी ने भी नाथ के सामने अलग राय रखने की हिम्मत नहीं दिखाई। यह स्थिति पार्टी के लिए भविष्य में चुनौती भी बन सकती है, क्योंकि संगठन सृजन अगर एक व्यक्ति के इर्द-गिर्द सिमट जाएगा, तो बाकी नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए जगह कहां बचेगी?
सियासी जानकारों का मानना है कि यह अभियान कांग्रेस के लिए उतना नहीं, जितना कमलनाथ के व्यक्तिगत नेटवर्क के लिए फायदेमंद रहा। चुनावी साल में यह नाथ की ताकत का सिग्नल भी है और यह संदेश भी कि प्रदेश कांग्रेस में अब कोई भी फैसला उनके इशारे के बिना नहीं हो सकता। यह रणनीति चुनावी गणित में कितनी कारगर होगी, यह तो समय बताएगा, लेकिन अभी के हालात में इतना तय है कि संगठन सृजन के नाम पर प्रदेश में कमलनाथ का ‘सत्ता सृजन’ पुख्ता हो गया है।
