Betul News:कानून की रफ्तार ऐसी कि सवाल दौड़ रहे हैं और जवाब अभी भी पैदल हैं!

कानून की रफ्तार ऐसी कि सवाल दौड़ रहे हैं और जवाब अभी भी पैदल हैं!

बैतूल। शहर में एक घर में घुसकर महिला, पुरुष और बच्चों के साथ मारपीट की घटना के बाद लोगों को उम्मीद थी कि कानून अपना पूरा दम दिखाएगा। लेकिन जब मामला धाराओं तक पहुंचा तो ऐसा लगा मानो गंभीर धाराओं को बीच रास्ते में ही आराम दे दिया गया हो।जनता हैरान है कि जिस घटना को सुनकर आम आदमी गंभीर मान रहा है, वही घटना कागजों पर पहुंचते-पहुंचते इतनी हल्की कैसे हो गई। लोगों का कहना है कि शायद कानून की किताब का कोई नया संस्करण बाजार में आ गया है, जिसकी जानकारी सिर्फ चुनिंदा लोगों तक ही पहुंची है।शहर में चर्चा है कि यदि घर में घुसकर मारपीट, महिलाओं और बच्चों में दहशत फैलाना भी गंभीरता की श्रेणी में नहीं आता, तो फिर गंभीर अपराध की परिभाषा जानने के लिए शायद कोई विशेष प्रशिक्षण लेना पड़ेगा। आम जनता तो पुराने सिलेबस से ही पढ़ाई कर रही है। उधर आरोपी पक्ष का आत्मविश्वास भी चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि कुछ लोग कानून को देखकर घबराते हैं, लेकिन यहां तो माहौल ऐसा दिखाई देता है मानो कानून ही किसी को देखकर घबरा गया हो। वही बेटा पैसे का प्रलोभन देकर खबर नहीं चलाने का बोलता है और मां झूठी एफआईआर दर्ज करने की धमकी देती हैं वहीं शहर के चौराहों से लेकर चाय की दुकानों तक एक ही सवाल गूंज रहा है क्या कानून की आंखों पर पट्टी बंधी है या फिर अब उसे वीआईपी चश्मा भी उपलब्ध करा दिया गया है? क्योंकि आम आदमी को तो छोटी-सी गलती पर नियम-कायदे पूरे याद दिला दिए जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में नियम भी शायद छुट्टी पर चले जाते हैं।

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