Betul News:एक रील से जागा जमीर, लेकिन जिले की बदहाल स्वास्थ्य, सड़क और शिक्षा व्यवस्था पर खामोशी क्यों?
इंटर्नशिप के अंतिम दिन विद्यार्थियों ने रील बना ली तो इतना बवाल क्यों? व्यवस्था की कमियों पर भी उठनी चाहिए आवाज, जवाबदेही सिर्फ विद्यार्थियों की ही क्यों?
एक रील से जागा जमीर, लेकिन जिले की बदहाल स्वास्थ्य, सड़क और शिक्षा व्यवस्था पर खामोशी क्यों?
इंटर्नशिप के अंतिम दिन विद्यार्थियों ने रील बना ली तो इतना बवाल क्यों? व्यवस्था की कमियों पर भी उठनी चाहिए आवाज, जवाबदेही सिर्फ विद्यार्थियों की ही क्यों?

बैतूल जिला अस्पताल में इंटर्नशिप कर रहे विद्यार्थियों द्वारा रील बनाए जाने का वीडियो सामने आने के बाद सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर बहस हो रही है। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या किसी एक रील को लेकर सवाल उठाना ही पर्याप्त है, या जिले की स्वास्थ्य, सड़क और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी इसी तरह आवाज उठाई जानी चाहिए? यदि विद्यार्थियों ने अपनी इंटर्नशिप के अंतिम दिन यादगार के तौर पर कोई रील बना ली, तो उसके पीछे की परिस्थितियों को समझना भी जरूरी है। हालांकि, यदि रील बनाने के दौरान मरीजों की निजता, अस्पताल के अनुशासन या स्वास्थ्य सेवाओं में बाधा से जुड़ी कोई बात सामने आती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। बिना पूरी जानकारी के किसी को दोषी ठहराना उचित नहीं है। लेकिन सवाल उन लोगों से भी है, जिनका जमीर आज एक रील देखकर जाग उठा है। जिले की स्वास्थ्य सेवाओं में कमियां हों, सड़कों की बदहाली हो या शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं क्या इन मुद्दों पर भी उतनी ही गंभीरता से सवाल उठाए जाते हैं? क्या व्यवस्था की जवाबदेही तय करने के लिए भी ऐसी ही सक्रियता दिखाई देती है? लोकतंत्र में सवाल उठाना जरूरी है, लेकिन सवालों का दायरा भी व्यापक होना चाहिए। किसी विद्यार्थी की एक गतिविधि पर आपत्ति है तो उसका आधार स्पष्ट होना चाहिए। साथ ही, सरकारी व्यवस्थाओं में सामने आने वाली कमियों पर भी तथ्यात्मक चर्चा और जवाबदेही की मांग होनी चाहिए।
