Betul News:मुलताई में गाड़ी की साइट को लेकर हुआ विवाद बदला सांप्रदायिक तनाव में धारा 144 लागू
कट गाड़ी का था, पर सोच ने समाज को काट दिया मुलताई में पहचान की आग फिर भड़की
मुलताई में गाड़ी की साइट को लेकर हुआ विवाद बदला सांप्रदायिक तनाव में धारा 144 लागू
कट गाड़ी का था, पर सोच ने समाज को काट दिया मुलताई में पहचान की आग फिर भड़की

बैतूल।गुरुवार शाम मुलताई बस स्टैंड रोड पर दो युवकों में मामूली झगड़ा हुआ वजह थी बस इतनी-सी कि किसने किसे कट मारा? पर कुछ ही मिनटों में यह सड़क का विवाद समाज की सोच का आईना बन गया।कहासुनी तब मोड़ ले गई जब एक युवक की पहचान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के जिला प्रचारक शिशुपाल यादव के रूप में सामने आई। दुसरा पक्ष धर्म विशेष समुदाय का निकला और बस, वहीं से शुरू हुआ पहचान की राजनीति का नाटक।अब मामला ट्रैफिक से आगे निकल गया था।सवाल अब गलती किसकी थी? नहीं रहा, बल्कि यह बन गया कौन किस पक्ष का है? कुछ ही घंटों में सड़क का झगड़ा सोशल मीडिया का मोर्चा बन गया। पोस्टें आईं, वीडियो चले, और देखते ही देखते मुलताई की हवा में हम बनाम वे की दीवार खड़ी हो गई।पुलिस ने फोर्स बढ़ाई, कुछ लोगों को हिरासत में लिया,
पर तब तक लोगों के मन में जाती और धर्म का वायरस फैल चुका था। कभी-कभी लगता है हमारी गाड़ियाँ सड़क पर नहीं, सोच के संकरे रास्तों में फँस गई हैं। एक कट से गुस्सा भड़कता है, और किसी की पहचान देखकर पूरा समाज दो हिस्सों में कट जाता है। सवाल यह नहीं कि झगड़ा क्यों हुआ बल्कि यह कि हम हर विवाद में जाति और धर्म का सॉफ्टवेयर क्यों इंस्टॉल कर चुके हैं? क्या अब यह सिस्टम सिर्फ पहचान देखने का आदी हो गया है?जब समाज की सोच स्टीयरिंग से ज्यादा पहचान पर मुड़ने लगे, तो ट्रैफिक का नहीं, विचारों का एक्सीडेंट तय है।
