Betul News:आदर्श आचार संहिता में नियमों की धज्जियां उड़ाते कान फोडू डीजे

आदर्श आचार संहिता में नियमों की धज्जियां उड़ाते कान फोडू डीजे!

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बैतूल। मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव की कैबिनेट की पहली ही बैठक में धार्मिक स्थल और अन्य स्थानों पर ध्वनि विस्तारक यंत्रों को अवैधानिक रूप से और तय मापदण्ड से अधिक बजाने पर प्रतिबंध लगाए जाने के संबंध में निर्णय लिया गया था. लेकिन उस नियमों की धज्जियां उड़ती दिखाई दे रही है।जहां मध्य प्रदेश में लोकसभा चुनाव को लेकर आदर्श आचार संहिता लगी हुई है वही आचार संहिता में लाउड डीजे के साथ जुलूस निकालकर प्रशासन के नियमो की किस तरह धजिया उड़ाई जा रही है जीता जागता उदाहरण देखने को मिल रहा है लेकीन क्या इस तरह साउंड के साथ जुलूस निकालना ओभि कान फाड़ू डीजे बजाने और लोगो को दिखाने लगे, वैसे किस की आस्था के साथ खिलवाड़ नही किया जा सकता लेकीन आस्था के नाम पर नियमो की धाजिया उड़ना कहा तक सही है!

वहीं प्रशासन को ध्यान देना चाहिए कि कितने डिसमिल साउंड डीजे से निकलना चाहिए जो जुलुस निकालते हैं उन्हें  साउंड बॉक्स अनुमति, जिसे देते वक्त साउंड बॉक्स की संख्या और गाने की गति कितनी होनी चाहिए निर्देश दिए जाते हैं। हालांकि कुछ लोग के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए कान फाडू गाने बजाते हैं ऐसे ही आयोजन समिति पर प्रशान ने करवाई करना चाहिए!दरअसल, शादी-ब्याह का सीजन आते ही सड़कों, मैरिज गार्डन सहित अनेक स्थानों पर धूमधड़ाके वाले बेहद तेज आवाज के कान फोड़ने वाले डीजे की बहार सी आ जाती है. दिन में तो ठीक लेकिन देर रात तक तेज आवाज में डीजे बजाना मानो फैशन सा बन गया है. हालांकि, इससे सिर्फ उन्हें ही आनंद मिलता है जिनके यहां समारोह होता है. बाकी आसपास निवास करने वाले लोगों को तो वह समय निकालना मुश्किल हो जाता है. विशेषकर ह्रदय रोगी, उम्रदराज व्यक्ति, नवजात शिशु,मरीज आदि इस तीव्र ध्वनि से खासे प्रभावित होते हैं.वहीं एक वाहन पर बड़े बड़े और काफी संख्या में बक्सों में तेज आवाज में संगीत बजाकर ध्वनि प्रदूषण फैलाते ये डीजे वाले सिर्फ व्यवसाय के लिए किसी की परवाह नही करते. डीजे बजवाने वाले भी उस समय ये भूल जाते हैं कि अन्य लोगों को कितनी परेशानी होती होगी. बैतूल मुख्यालय समेत पुरे इलाके में डीजे के कान फाडू आवाज और फूहर द्वि अर्थी अश्लील गीतों के प्रचलन से आम लोग परेशान है.लोगो को यह समझ में नही अती है की ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण कानून निष्प्रभावी कैसे हो गया है . कानूनो की खुले आम धज्जियां उड़ रही है । फिर भी अधिकारी मौन क्यों है .

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