Bhopal News:माइक और कैमरा लेकर गया था… लौटा खून में लथपथ एक पत्रकार चुप क्यों है सिस्टम?
माइक और कैमरा लेकर गया था… लौटा खून में लथपथ एक पत्रकार चुप क्यों है सिस्टम?

बैतूल।अगर किसी को जानना है कि इस देश में अभिव्यक्ति की आज़ादी किस हालत में है पत्रकारों पर बढ़ते हमलों ने एक बार फिर सिस्टम की गंभीरता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। हाली इंदौर में हुई हमले में एक पत्रकार को सैकड़ों की भीड़ ने निशाना बनाया उसके हाथ में न कोई हथियार था, न कोई आक्रामकता सिर्फ एक माइक और एक कैमरा था। वही कैमरा, जिसकी फुटेज देखकर पुलिस और प्रशासन अक्सर अपनी कार्रवाई को सही ठहराते हैं, वही माइक जिससे जनता की आवाज़ सत्ता तक पहुँचती है उसी पत्रकार को बेरहमी से पीटा गया। सवाल पूछना पत्रकार की नौकरी है डरना पत्रकार के स्वभाव में नहीं लेकिन कुछ दिन पहले डर पैदा करने की कोशिश हुई पीड़ित पत्रकार किसी कवरेज के लिए गया था। जैसे हर रिपोर्टर जाता है निष्पक्ष नज़र और सच्चाई दिखाने का साहस लेकर। लेकिन भीड़ ने उसे चारों ओर से घेर लिया। मारपीट इतनी नृशंस कि वह ज़मीन पर गिर गया, फिर भी थप्पड़, लातें और घूँसे रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो हमलावरों की संख्या इतनी अधिक थी कि किसी ने बीच-बचाव की हिम्मत ही नहीं दिखाई।जो पत्रकार आपके लिए सड़क पर खड़े होते हैं… उसी को सड़क पर पीटा गयायही पत्रकार कभी पुलिस का सख़्त चेहरा दिखाता है, कभी ट्रैफिक में खड़े जवानों की मुश्किलें। यही पत्रकार अव्यवस्थाओं पर सवाल उठाता है, भ्रष्टाचार की फाइलें खोलता है, और जनता की छोटी से छोटी परेशानी को बड़े मंच तक पहुँचाता है।लेकिन वही पत्रकार जब खुद पीड़ित हुआ—तब सिस्टम की चाल धीमी पड़ गई।थाने में घंटों बिठाया, कार्रवाई नहीं तैयारी सिर्फ ड्रामा की मारपीट के बाद जब घायल पत्रकार रिपोर्ट दर्ज कराने पहुँचा तो उसे इंसाफ़ की जगह इंतज़ार मिला।घंटों थाने में बैठाए रखा गया, बयान लेने में देरी की गई, और आरोपीयों पर तत्काल कार्रवाई की बजाय कानूनी प्रक्रिया का हवाला दिया गया।सूत्रों के मुताबिक, कुछ नामचीन हमलावरों को बचाने की कवायद भी चली।पुलिस की तथाकथित सख़्ती, पीड़ित के सामने खोखली नज़र आई।पत्रकार मार खाने के लिए नहीं बने।वे इसलिए बने क्योंकि उन्हें भरोसा था कि वे समाज की आवाज़ हैं।लेकिन जब समाज ही चुप हो जाए, तो गुंडों के हाथ और ताकतवर हो जाते हैं। कल फिर कोई पत्रकार पिट सकता है… और तब भी सवाल वही रहेगा क्या सिस्टम जागेगा?माइक और कैमरा उठाने वाला हाथ कमजोर नहीं था कमजोर था सिस्टम का रवैया।और यही रवैया आज सवालों के कटघरे में है।
