Betul News:भ्रष्टाचार की छाया में अधूरा मंच: श्रद्धालुओं की सुविधा अधर में लटकी
पांच साल में मंच नहीं बना, पर पूरा बजट खर्च सरपंच, सचिव से लेकर जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
भ्रष्टाचार की छाया में अधूरा मंच: श्रद्धालुओं की सुविधा अधर में लटकी
पांच साल में मंच नहीं बना, पर पूरा बजट खर्च सरपंच, सचिव से लेकर जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल

बैतूल :-जिले के विकास खंड आठनेर कि ग्राम पंचायत मुसाखेड़ी में देवी माता मंदिर के पास श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्वीकृत मंच निर्माण कार्य आज तक अधूरा पड़ा है, जबकि इसके लिए वर्ष 2018-19 में तत्कालीन विधायक श्री निलय डागा द्वारा ₹2 लाख की राशि स्वीकृत की गई थी। हैरानी की बात यह है कि यह राशि पंचायत द्वारा आहरित कर ली गई, लेकिन ज़मीनी स्तर पर मंच निर्माण महज़ ईंटों के ढेर और खंभों के ढांचे तक ही सीमित रह गया।इस मामले ने एक बार फिर से ग्रामीण क्षेत्रों में व्याप्त भ्रष्टाचार, प्रशासनिक उदासीनता और जवाबदेही की कमी को उजागर कर दिया है। स्थानीय ग्रामीणों की माने तो यह न सिर्फ आर्थिक गड़बड़ी का मामला है, बल्कि एक धार्मिक स्थल की गरिमा के साथ भी खिलवाड़ है।मरही माय घाट पर स्थित देवी माता मंदिर में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। धार्मिक आयोजनों, भजन संध्याओं और त्योहारों के दौरान श्रद्धालुओं को बैठने की सुविधा देने के उद्देश्य से इस मंच का निर्माण प्रस्तावित किया गया था। मगर श्रद्धा और सुविधाओं की उम्मीद में स्वीकृत यह राशि आज भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है।
ग्रामीणों का आरोप – पूर्व सरपंच और सचिव ने की राशि की बंदरबांट

ग्रामीणों ने पूर्व सरपंच भोजराव उइके और तत्कालीन सचिव रामराव गणेशे पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इन्होंने योजना के नाम पर पूरी राशि तो निकाल ली, लेकिन मंच का निर्माण अधूरा छोड़ दिया। न तो गांव में जनप्रतिनिधियों द्वारा कोई सूचना दी गई और न ही निर्माण कार्य की पारदर्शिता सुनिश्चित की गई।मामले की गंभीरता तब और बढ़ जाती है जब यह सामने आता है कि न तो जनपद पंचायत के सीईओ, न उपयंत्री और न ही पंचायत निरीक्षक ने कार्यस्थल का समुचित निरीक्षण किया। ग्रामीणों का सवाल है – जब निर्माण अधूरा था, तो भुगतान कैसे हुआ? क्या संबंधित अधिकारियों ने जानबूझकर आंख मूंदी या फिर वे भी इस गड़बड़ी में शामिल थे? देवी मंदिर जैसे धार्मिक स्थल के नाम पर मिली निधि का इस तरह से दुरुपयोग होना, ग्रामीणों की आस्था पर सीधा आघात है। जागरूक नागरिकों ने अब कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ न केवल आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए, बल्कि राशि वसूला जाए और अधूरा कार्य जल्द से जल्द पूरा करवाया जाए।यह कोई पहला मामला नहीं है, जब पंचायत प्रतिनिधियों पर निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार के आरोप लगे हों, लेकिन इस बार मामला एक धार्मिक स्थल से जुड़ा है, जिसे नजरअंदाज करना ग्रामीणों के लिए असहनीय बन गया है। सवाल अब यह है कि क्या प्रशासन इस पर कड़ी कार्रवाई कर उदाहरण पेश करेगा या फिर यह प्रकरण भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दफन हो जाएगा? यह अधूरा मंच आज मुसाखेड़ी गांव में सिर्फ एक निर्माण नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार, उदासीनता और ग्रामीण विकास में गहरी सेंध का प्रतीक बन गया है। जनता अब केवल जवाब नहीं, कार्रवाई चाहती है – ताकि आने वाले समय में कोई भी जनप्रतिनिधि या अधिकारी जनता की आस्था और अधिकारों के साथ खिलवाड़ करने की हिम्मत न कर सके।
