Betul Breking News:भैंसदेही की बीएमओ स्वाति बरखडे की लापरवाही के चलते मजदूर की मौत!
भैंसदेही की बीएमओ स्वाति बरखडे की लापरवाही के चलते मजदूर की मौत!

भैसदेही विकास खंड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बीएमओ (खंड चिकित्सा अधिकारी) डॉ. स्वाति बरखड़े की गैर-जिम्मेदाराना हरकत ने एक गरीब परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है। डॉ. स्वाति 16 अगस्त 2024 से बिना किसी पूर्व सूचना के अपने कर्तव्यों से अनुपस्थित हो गई थीं, और उन्होंने किसी अन्य अधिकारी को अपना प्रभार भी नहीं सौंपा है। इस वजह से भैसदेही का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अव्यवस्थित तरीके से चल रहा है, और आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।दुर्घटना दिनांक 19 अगस्त 2024 को, डॉ. स्वाति बरखड़े अपने साथी रजत मंडराई के साथ कार में सफर कर रही थीं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इंदौर-बैतूल राष्ट्रीय राजमार्ग पर, उनकी कार ने टेमागांव के पास एक मोटरसाइकिल सवार मजदूर राजेंद्र मंसूरे (47 वर्ष) को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में राजेंद्र गंभीर रूप से घायल हो गए, और उन्हें तिमरनी अस्पताल भेजा गया। दुर्भाग्य से, हरदा ले जाते समय रास्ते में उनकी मौत हो गई।
दुर्घटना के बाद तनावपूर्ण स्थिति हो गई थी:
गांव में इस घटना के बाद गहरा तनाव उत्पन्न हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दुर्घटना इतनी भयावह थी कि कार अनियंत्रित होकर खेतों में जा घुसी। घटना के बाद, गांव वालों में आक्रोश फैल गया, लेकिन मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को संभाला और मामले को शांत किया। कार में सवार डॉ. स्वाति और रजत मंडराई दोनों सुरक्षित थे, लेकिन घटना ने एक गरीब परिवार की रोजी-रोटी का सहारा छीन लिया।
राजनेताओं का दबाव
सूत्रों के अनुसार, कुछ राजनेताओं द्वारा इस मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। डॉ. स्वाति बरखड़े और उनके साथी रजत को राजनीतिक संरक्षण मिलने की संभावना जताई जा रही है, जिससे इस गंभीर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि प्रभावशाली लोगों की भागीदारी के कारण घटना को मीडिया में अधिक तवज्जो नहीं मिल रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बैतूल सीएमएचओ को इसकी जानकारी है कि बीएमओ स्वाति बरखडे बीना सुचना दिए गई थी उसके बाजूद अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई!
आगे की जानकारी अगले अंक में, यह खुलासा किया जाएगा कि किन राजनेताओं और अधिकारियों का समर्थन डॉ. स्वाति को प्राप्त हो रहा है और कैसे वे इस मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं।
इस दुखद घटना ने यह सवाल उठाया है कि कब तक गरीब और कमजोर वर्ग के लोग प्रशासन और नेताओं की अय्याशी का शिकार होते रहेंगे?
