Betul News:अधिकारियों के नाम पर लिया पैसा, फोन पे और नगद लेन-देन का खुलासा
जांच समिति के समक्ष कार्यकर्ताओं के बयान, झूठ बोलने का बनाया गया दबाव
अधिकारियों के नाम पर लिया पैसा, फोन पे और नगद लेन-देन का खुलासा
जांच समिति के समक्ष कार्यकर्ताओं के बयान, झूठ बोलने का बनाया गया दबाव
बयानबाजी के बीच फंसा सेक्टर सुपरवाइजर ज्योति भालेकर का मामला

बैतूल। धनोरा आंगनबाड़ी केंद्र की कार्यकर्ताओं ने सुपरवाइजर ज्योति भालेकर के खिलाफ अवैध वसूली का मामला परियोजना अधिकारी के सामने उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्योति भालेकर ने आडिट के नाम पर प्रत्येक केंद्र से दो-दो हजार रुपए नकद वसूल किए। इसके अलावा, उच्च अधिकारी के नाम पर 300 रुपए प्रति केंद्र मांगे गए। कार्यकर्ताओं ने यह भी बताया कि रेखा शेषकर और सुखसैया झरबडे के माध्यम से पैसे वसूले गए। रेखा शेषकर को रोशनी यादव और रीमा हरसुले ने 300 रुपए फोन पे के माध्यम से दिए, जो बाद में कुसुम बारस्कर को सौंपे गए। कुसुम बारस्कर ने 1200 रुपए सुखसैया झरबडे को दिए, जिन्होंने ये राशि सुपरवाइजर ज्योति भालेकर को सौंप दी।शशिकला माकोड़े ने जांच समिति को दिए अपने बयान में बताया कि 17 नवंबर 2024 को उन्हें और उनके भाई को फोन कर झूठ बोलने और बयान बदलने का दबाव बनाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि उन्होंने ऐसा नहीं किया, तो उनकी नौकरी चली जाएगी। ललिता कवडे और सुखसैया झरबडे ने भी जांच समिति के सामने अपने बयान दिए। ललिता कवडे ने कहा कि ऑडिट के नाम पर उनसे 1500 रुपए लिए गए और 500 रुपए प्रति माह देने को कहा गया। हालांकि, उन्होंने 300 रुपए नहीं दिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शशिकला माकोड़े के साथ उनकी कभी कोई बहस नहीं हुई।
जांच समिति के समक्ष कार्यकर्ताओं ने खुलासा किया कि सुपरवाइजर द्वारा वसूली की रकम की पूरी जानकारी है। सुखसैया झरबडे ने बताया कि उन्होंने 2400 रुपए सुपरवाइजर को सौंपे थे। कार्यकर्ताओं ने कहा कि उन पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं और उनकी कोई गलती नहीं है। धनोरा और सेंदूरझना की कार्यकर्ताओं ने परियोजना अधिकारी और कलेक्टर से मांग की है कि सुपरवाइजर ज्योति भालेकर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
