Corruption News:मनरेगा योजना में खुली लूट: गोरेगांव पंचायत में मजदूरों की मजदूरी हड़पने का मामला उजागर
जेसीबी से हुआ कार्य, मस्टर रोल में फर्जीवाड़ा, जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे – सरपंच से लेकर सहायकयंत्री तक सवालों के घेरे में
मनरेगा योजना में खुली लूट: गोरेगांव पंचायत में मजदूरों की मजदूरी हड़पने का मामला उजागर
जेसीबी से हुआ कार्य, मस्टर रोल में फर्जीवाड़ा, जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे – सरपंच से लेकर सहायकयंत्री तक सवालों के घेरे में

बैतूल :- जिले के भैंसदेही विकासखंड की ग्राम पंचायत गोरेगांव में मनरेगा योजना के तहत किए जा रहे कार्यों में गंभीर अनियमितताओं का पर्दाफाश हुआ है। गांव के कृषक पुनु पिता निंबा के खेत में बनाए जा रहे खेत तालाब निर्माण कार्य में योजना के मूल उद्देश्यों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। जिस योजना के अंतर्गत गांव के मजदूरों को काम देकर उन्हें आर्थिक संबल प्रदान करना था, उसी योजना का उपयोग चंद लोगों ने निजी लाभ के लिए कर लिया।ग्रामीणों के अनुसार खेत तालाब निर्माण में जेसीबी मशीन का उपयोग किया गया, जबकि मनरेगा योजना के स्पष्ट निर्देश हैं कि ऐसे कार्य पूर्णतः श्रम आधारित होंगे। मशीन से कार्य करवा कर मजदूरों के हक पर सीधा डाका डाला गया है। इससे मजदूरों को रोजगार नहीं मिला और सरकारी धन की भी बर्बादी हुई।यह भी सामने आया है कि जिस स्थान पर कार्य की टीएस (टेक्निकल सैंक्शन) दी गई थी, वहां निर्माण न कराकर कार्य को डूब क्षेत्र की भूमि पर करवा दिया गया। यह भूमि खेती के लिए उपयुक्त नहीं है, ऐसे में खेत तालाब बनाने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। इससे साफ जाहिर होता है कि योजना सिर्फ कागजों में क्रियान्वित की गई और जमीनी स्तर पर सिर्फ भ्रष्टाचार किया गया।जब इस मामले में ग्राम रोजगार सहायक से सवाल किया गया तो वह जवाब देने से बचते नजर आए। उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि जियोटैगिंग किस स्थान की की गई और टीएस किस जमीन पर दी गई थी। न ही यह बताया गया कि मस्टर रोल में किन मजदूरों के नाम पर हाजिरी दर्ज की गई और उनका भुगतान किस प्रकार किया जा रहा है।इसी प्रकार सामग्री के बिलों की प्रमाणिकता, उपयंत्री व सहायक यंत्री द्वारा स्थल निरीक्षण, और सचिव व सरपंच की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या अधिकारियों ने आंख मूंदकर रिपोर्ट तैयार कर दी? क्या पूरे मामले की पूर्व-स्वीकृति और जांच प्रक्रिया में मिलीभगत थी? ग्रामीणों का कहना है कि यह भ्रष्टाचार कोई साधारण लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित बंदरबांट है, जिसमें सभी जिम्मेदार अधिकारी और पंचायत प्रतिनिधि शामिल हैं। मनरेगा जैसी जनहितकारी योजना का दुरुपयोग कर मजदूरों की मेहनत की कमाई को हड़प लिया गया है।जब पंचायत सचिव से इस मामले में संपर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होंने या तो मोबाइल बंद कर लिया या हर बार स्थल पर न होने की बात कहकर बचते रहे। कभी खुद को पंचायत में, तो कभी गुदगांव में बताकर वे पत्रकारों से भी सवालों से बचते रहे। यह स्पष्ट करता है कि वे भी इस पूरे मामले में गहरी संलिप्तता रखते हैं और जवाब देने से कतरा रहे हैं।ग्रामीणों में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि पंचायत के जिम्मेदारों ने योजना के तहत कार्य करवा कर न मजदूरों को रोजगार दिया और न ही काम का सही स्थान चुना, सिर्फ और सिर्फ घोटाला करने का जरिया बना लिया।ग्रामीणों ने जनपद सीईओ से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की अपेक्षा जताई है। जनपद सीईओ की अब तक की छवि स्वच्छ और कठोर प्रशासनिक रवैये की रही है, ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वे इस मामले में कोई उदाहरण प्रस्तुत करते हैं या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।हमने इस मामले को पहले भी प्रमुखता से प्रकाशित किया था, लेकिन अब जबकि सबूत और साक्ष्य खुलकर सामने आ चुके हैं, यह समय है कि प्रशासन दोषियों पर सख्त कार्रवाई कर एक सख्त संदेश दे – कि जनहित की योजनाओं से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।ग्रामीणों की यही मांग है – मनरेगा योजना में लूट करने वालों पर कार्रवाई हो, मजदूरों को न्याय मिले और योजना का उद्देश्य सही मायनों में पूरा किया जाए।
