Betul News:बच्चियों को गोलियां और जिम्मेदारों की गोलमोल बातें!
बच्चियों को गोलियां और जिम्मेदारों की गोलमोल बातें!

शाहपुर के एक छात्रावास की बच्चियों को गर्भनिरोधक गोलियां दिए जाने की खबर सुनकर हर कोई दंग है। होगा भी क्यों नहीं बच्चियों ना बताया भी कलेक्टर को लेकिन प्रशासन की प्रतिक्रिया तो देखिए निलंबन कर दिया, जांच बैठा दी, प्रेस नोट जारी कर दिया… और बस!अरे भैया, सवाल यह नहीं कि किसे कुर्सी से हटाया गया, सवाल यह है कि बच्चियों को आखिर गोलियां क्यों दी गईं?
क्या इन बच्चियों का शरीर कोई प्रयोगशाला है?
क्या छात्रावास में इनके भविष्य से खिलवाड़ कर कार्रवाई की फाइल मोटी करने का ठेका मिल गया है? कुछ बड़े न्यूज टीवी पर ब्रेकिंग पट्टी चल गई, एंकर ने दो मिनट दुख जताया, फिर अगली स्टोरी पर बढ़ लिए। असली सवाल पूछने की हिम्मत किसी ने नहीं की। प्रशासन का अंदाज़ देखिए जांच करेंगे, सख्त कार्रवाई होगी।मानो अब तक बैतूल में हर जांच का नतीजा जनता ने भूल ही तो रखा है! दरअसल, यहाँ खेल सिर्फ जिम्मेदारी टालने का है। बच्चियों के गले से गोलियां उतारने का नहीं, बल्कि जिम्मेदारों के गले से पेंच कसने का समय है।और हाँ, बच्चियों के सवाल आज भी वही हैं!आखिर हमें गोलियां क्यों दी गईं? कौन था इसके पीछे? और हमारी जिंदगी से यह खिलवाड़ किसकी मेहरबानी से हुआ?जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक निलंबन, जांच और बयानबाज़ी सब गोलमाल ही है!जैसे ही मामला तूल पकड़ता है, सबसे आसान फार्मूला निलंबन। निलंबित करो, प्रेस नोट जारी करो और जनता को भरोसे का झुनझुना थमा दो।
लेकिन अनोखा सच का सवाल वही गोलियां क्यों दी गईं?
