Vaccine News:एचपीवी वैक्सीन अभियान के बीच उठे सवाल जागरूकता के साथ जिम्मेदारी कौन लेगा?
एचपीवी वैक्सीन अभियान के बीच उठे सवाल जागरूकता के साथ जिम्मेदारी कौन लेगा?

बैतूल। पूरे भारत में बालिकाओं को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के उद्देश्य से एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) वैक्सीन लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग इन दिनों बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चला रहा है। स्कूलों, आंगनवाड़ियों और स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से अभिभावकों को बताया जा रहा है कि कम उम्र में यह टीका लगने से भविष्य में गंभीर बीमारी का खतरा कम हो सकता है।
लेकिन इस अभियान के साथ ही एक दूसरा पहलू भी सामने आ रहा है अभिभावकों के मन में उठते सवाल। कई लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या वैक्सीन को लेकर पूरी जानकारी दी जा रही है या केवल इसके फायदे बताकर लोगों को टीकाकरण के लिए प्रेरित किया जा रहा है।स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार एचपीवी वायरस महिलाओं में होने वाले सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण माना जाता है। इसी खतरे को देखते हुए भारत सहित दुनिया के कई देशों में यह वैक्सीन दी जा रही है।डॉक्टरों का कहना है कि यदि 9 से 14 वर्ष की उम्र में यह टीका लग जाता है, तो भविष्य में इस कैंसर का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।
जागरूकता अभियान के बीच कई उन सवालों के जवाब आखिर कौन देगा!
क्या यह वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है?
क्या इसके संभावित साइड इफेक्ट के बारे में खुलकर जानकारी दी जा रही है?
क्या वैक्सीन लगाने से पहले अभिभावकों को सरकारिया स्वास्थ्य विभाग लिख कर देगा कि अगर भविष्य में वैक्सीनेशन के साइड इफेक्ट होता है तो इसकी पूर्ण जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग और सरकार की होगी ?
अगर भविष्य में किसी तरह का दुष्प्रभाव सामने आता है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
सरकारी अभियानों में अपील तो बहुत दिखाई देती है, लेकिन जिम्मेदारी की बात अक्सर पीछे रह जाती है।
