Political News:देवी के नाम पर दिखावा, कन्याओं का अपमान भाजपा नेताओं का अहंकार या संस्कारों की असली तस्वीर?

देवी के नाम पर दिखावा, कन्याओं का अपमान भाजपा नेताओं का अहंकार या संस्कारों की असली तस्वीर?

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नवरात्र का पर्व भारतीय समाज में कन्या के सम्मान का पर्व माना जाता है। देवी का स्वरूप मानकर बच्चियों के चरण धोकर पूजन करने की परंपरा है। मगर जब यही बच्चियाँ नेताओं के पैरों में बैठा दी जाएँ, तो यह परंपरा नहीं—अहंकार का प्रदर्शन कहलाता है।प्रदेश के बड़े-बड़े भाजपा नेता मंच की ऊँची कुर्सियों पर विराजमान रहे और कन्याएँ उनके पैरों के नीचे। तस्वीर सामने आई तो सोशल मीडिया पर हंगामा मचना ही था। सवाल यही उठा क्या यही है भाजपा का संस्कार? कांग्रेस ने इसे हाथों-हाथ लपक लिया। ‘सद्बुद्धि यज्ञ’ करके भाजपा नेताओं को आईना दिखाने का प्रयास किया और कहा कि “जो बच्चियों का सम्मान नहीं कर सकते, वे देवी की पूजा का केवल ढोंग कर सकते हैं। यही है भाजपा का असली चरित्र।क्या यही भाजपा के संस्कार हैं? जहां कन्या पूजन से पर्व की शुरुआत होती है, वहां कन्याओं को पैरों में बिठाना किस संस्कृति का हिस्सा है? देवी का अपमान कर भाजपा आखिर जनता को क्या संदेश देना चाहती है? कांग्रेस जिल अध्यक्ष नील धागों अपने सोशल मीडिया पेज पर फोटो शेयर कर लिखा भाजपा नेताओं का अहंकार चरणों में प्रतीक स्वरूप नौ दुर्गा कन्या ब्लाक कांग्रेस ने रखा सदबुद्धि यज्ञ लोगों ने इसे भाजपा नेताओं के अहंकार, दिखावे और सत्ता-प्रदर्शन की पराकाष्ठा बताया है। वही लोगों का कहना है कि इस तरह घटना ने भाजपा की नवरात्रि राजनीति पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। विपक्ष अब इसे मुद्दा बना कर सोशल मीडिया पर वायरल कर रहे हैं। इतना ही नहीं कांग्रेस ने साफ कहा है कि जो बच्चियों का सम्मान नहीं कर सकते, वे समाज और देवी की पूजा का दिखावा ही कर सकते हैं।

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