Polise News:मानव दुर्व्यापार जैसे विषय पर समाज को संवेदनशील होने की आवश्यकता: एएसपी जोशी

दण्ड देने के लिए नहीं न्याय दिलाने के लिए किये गए हैं बदलाव: शिखा

मानव दुर्व्यापार जैसे विषय पर समाज को संवेदनशील होने की आवश्यकता: एएसपी जोशी

दण्ड देने के लिए नहीं न्याय दिलाने के लिए किये गए हैं बदलाव: शिखा

नये कानून और मानव दुर्व्यापार विषय पर आवाज और महिला सुरक्षा शाखा, म.प्र. एवं बैतूल पुलिस के संयुक्त तत्त्वावधान में एकदिवसीय प्रशिक्षण संपन्न

बैतूल/ मानव दुर्व्यापार जैसे विषय पर पुलिस को संवेदनशील होने की आवश्यकता। उक्त बात आज बैतूल में “नये कानून और मानव दुर्व्यापार” विषय पर आवाज संस्था एवं महिला सुरक्षा शाखा,म.प्र. एवं बैतूल पुलिस के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित प्रशिक्षण में कमला जोशी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, बैतूल ने एक दिवसीय कार्यशाला के शुभारम्भ अवसर पर कही।उन्होंने कहा कि आवाज संस्था जनसामान्य में बच्चों की सुरक्षा के प्रति जागरूकता की अलख जगाने का काम कर रही है।आवाज द्वारा मानव दुर्व्यापार विषय पर बेहतर प्रशिक्षण आयोजित किया है। इसके पहले अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जोशी ने दीप प्रज्जवलित कर प्रशिक्षण का शुभारंभ किया और सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दी।इसके अतिरिक्त, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, बैतूल ने कहा कि नए कानूनों ने पुलिस प्रक्रिया को आसान बनाने का कार्य किया है, मानव दुर्व्यापार जैसे अपराधों पर लगाम लगाने के लिए मील का पत्थर साबित होंगे।आवाज के राज्य समन्वयक श्री नितेश व्यास ने बताया कि आवाज बाल संरक्षण और मानव दुर्व्यापार विषय पर मध्यप्रदेश के 6 जिलों में काम कर रहा है लेकिन बैतूल जिला महाराष्ट्र बॉर्डर के पास होने के कारण यहाँ से बच्चों के दूसरे राज्य में ट्रैफिकिंग होने की संभवना बढ़ जाती है इसलिए यहाँ अतिरिक्त सावधानी रखने की जरुरत है।इस मौके पर प्रशिक्षक की भूमिका निभा रही भोपाल की सुश्री शिखा छिब्बर ने बताया कि महिलाओं और बच्चों को लेकर काफी बदलाव हुए हैं जिन्हे समझने और सही से लागू करने की जरूरत है।

उन्होंने मानव दुर्व्यापार को लेकर माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों और नए प्रावधानों का भी जिक्र किया। नए कानून में बच्चे की परिभाषा को स्पष्ट किया गया है, इसी तरह कई धाराओं में संशोधन भी किये गए हैं जिन्हें विस्तार से प्रशिक्षण में बताया गया।बैतूल में आवाज के जिला समन्वयक श्री भूपेंद्र लोखंडे ने बताया कि बैतूल एक संवेदनशील जिला है यहां अधिकतम जनता पलायन पर निर्भर है और इसके आड़ में कई बार लोगों का गायब होना एक संवेदनशील फैक्टर के रूप में काम करता है। बैतूल ट्रैफिकिंग के लिए एक सोर्स जिले के रूप में है जहां से बच्चों को अलग-अलग उद्देश्य से बाहर भेजा जाता है जैसे काम पर लगाने, पढाई करने और भी इसी प्रकार के काम और इसमें कई बार परिचित व्यक्ति या रिश्तेदार ही ट्रैफिकिंग में शामिल होते हैं प्रशिक्षण में जिले में पदस्थ एसडीओपी, समस्त थानों के थाना प्रभारी, थानो के बाल कल्याण अधिकारी, विशेष किशोर पुलिस इकाई, ऊर्जा डेस्क अधिकारी सहित लगभग 45 लोग अधिकारियों पदाधिकारियों के साथ प्रशिक्षण किया गया l इसके साथ ही नए कानून के प्रावधानों के अनुसार सभी अधिकारी/पदाधिकारियों को शामिल करते हुए नाटक भी कराया गया|प्रशिक्षण में सम्मिलित और सहयोगी सभी लोगों का आभार प्रदर्शन राज्य समन्वयक व्यास ने किया | कार्यक्रम का संचालन आवाज के ब्लॉक समन्वयक विनीत धोतेकर ने किया।

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