Betul News:स्वयंभू ‘पत्रकारों’ की भीड़ से चौथा स्तंभ हुआ लहूलुहान बिना प्रमाण खबरें उड़ाने वालों का टिकली युग’!

स्वयंभू ‘पत्रकारों’ की भीड़ से चौथा स्तंभ हुआ लहूलुहान बिना प्रमाण खबरें उड़ाने वालों का टिकली युग’!

बैतूल।लोकतंत्र का चौथा स्तंभ आज बाहरी दबावों से नहीं, बल्कि भीतर घुसे उन स्वयंभू “पत्रकारों” से कमजोर होता जा रहा है—जो न पत्रकारिता का अर्थ समझते हैं, न खबर की ज़िम्मेदारी, पर पहचान-पत्र गले में झुलाते हुए खुद को ‘प्रमाणित पत्रकार’ घोषित करने में सबसे आगे रहते हैं।चंद लोग, जिन्हें खबर का क समझ नहीं, वही आज पत्रकारिता की गरिमा को सबसे ज्यादा ठेस पहुँचा रहे हैं। असली मेहनत करने वाले पत्रकार जहाँ विश्वसनीयता बचाने की जंग लड़ रहे हैं, वहीं ये ‘मोबाइल-धारी मीडिया योद्धा’ बिना तथ्य, बिना जांच और बिना समझ के सनसनी फैलाने में जुटे हैं। सवाल पत्रकारिता की दुनिया कहाँ जा रही हैं और इसे चलाने का दावा आखिर कौन कर रहा है यह ज्यादा बड़ा प्रश्न बन गया है।कॉपी-पेस्ट कर बनी स्क्रिप्ट को मेरी एक्सक्लूसिव बताकर परोसने वाले ये तथाकथित पत्रकार अब बिना प्रमाण की खबरें बनाकर शहर में वायरल करने का ठेका लिए बैठे हैं। असली रिपोर्टिंग इनके लिए मेहनत का नहीं, सिर्फ ‘टिकली फॉरवर्ड’ का खेल बन चुकी है।सबसे चिंताजनक यह कि हाल के दिनों में फैलाई गई कई ‘मनगढ़ंत खबरें’ न सिर्फ ग़लत थीं, बल्कि जानबूझकर किसी की छवि खराब करने की नीयत से तैयार की गई थीं। और यह पत्रकारिता नहीं, बल्कि भ्रम और अविश्वास फैलाने की एक साजिश है।पत्रकार का काम सच्चाई दिखाना होता है, न कि अफवाहों को खबर बनाकर जनता के भरोसे के साथ खिलवाड़ करना। लेकिन शहर में सक्रिय कुछ लोग आज बिना सत्यापन, बिना तथ्य और बिना जिम्मेदारी “खबर” बनाने में इतने आगे हैं कि चौथा स्तंभ उनके चलते भर भराकर गिरने की कगार पर दिखने लगा है।जरूरत है कि पत्रकारिता को पेशे के नाम पर चल रहे इस तमाशे, इस फर्जी भीड़ और इस ‘वायरल मशीनरी’ से बचाया जाए क्योंकि चौथा स्तंभ शब्दों से नहीं, विश्वास से खड़ा होता है। और विश्वास, स्वयंभू पत्रकारों की टिकली से नहीं, असली पत्रकारों की मेहनत से पैदा होता है।

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.