Betul News:बैतूल में ‘साहब’ के आते ही जिन जाग उठे, घिस गया कोई चिराग?

ऑफिस के चक्कर लगाने लगे जिन 

बैतूल में ‘साहब’ के आते ही जिन जाग उठे, घिस गया कोई चिराग?

ऑफिस के चक्कर लगाने लगे जिन 

बैतूल।हरदा से साहब का तबादला क्या हुआ, बैतूल की फिजाओं में जैसे नई उर्जा घुल गई। साहब के कदम पड़ते ही ऑफिसों के दरवाजे अपने-आप खुलने लगे, और उनके ‘जिन’ जो शायद बहुत दिनों से बोतल में बंद थे  अचानक प्रकट हो गए। फिर क्या था, साहब के नाम की सुगंध ऐसी फैली कि चायवाले से लेकर फाइल वाले तक सबकी गर्दन एक ही दिशा में घूम गई कितना लाया होगा, और अब कितना बटोरना है? सूत्रों की मानें तो ट्रांसफर की प्रक्रिया में कुछ पेटी की ‘कवायद’ हुई। अब ये पेटी लकड़ी की थीं या नोटों की, ये तो वही जानें जिन्होंने भेजी थीं। पर इतना तय है कि साहब को कोई अफसोस नहीं है पेटी देने में क्यों कि साहब बैतूल की नब्ज़ जो पहचानते हैं! कहा तो यह भी जा रहा है कि साहब की डायरी में ‘बैतूल प्रोजेक्ट’ के नाम से एक अलग पन्ना है, जिसमें लिखा है

रिटायरमेंट से पहले जितना निकाल सकते हो, निकाल लो  सिस्टम तो है ही मदद को!

अब देखना यह है कि साहब के जिन और भी किस-किस दफ्तर की खिड़कियाँ खटखटाते हैं। शहर में चर्चा का विषय चाय की दुकानों पर बना है वही लोग कहते फिर रहे है कि बैतूल की बारी फिर से आ गई है साहब के हिसाब से हिसाब चुकता करने की!

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