Betul News:सोशल मीडिया का स्वघोषित सचिन मालवीय पर कार्रवाई कब करेगा प्रशासन?
सोशल मीडिया का स्वघोषित सचिन मालवीय पर कार्रवाई कब करेगा प्रशासन?

बैतूल। जिले में इन दिनों सोशल मीडिया का एक ऐसा “न्याय मंच” सक्रिय बताया जा रहा है, जहां न अदालत की जरूरत है, न सबूतों की बस फोटो-वीडियो अपलोड कीजिए और किसी की भी छवि पर सवालिया निशान लगा दीजिए। आरोप है कि यही काम इन दिनों एक युवक सचिन मालवीय के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से किया जा रहा है, जिस पर लोगों की तस्वीरें और वीडियो बिना अनुमति के पोस्ट कर उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के आरोप लग रहे हैं।बताया जा रहा है कि शहर के कुछ जागरूक नागरिकों ने इस मामले में पुलिस प्रशासन को शिकायत भी सौंपी है। शिकायत में कहा गया है कि संबंधित युवक लगातार लोगों की निजी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर रहा है, जिससे कई लोगों की सामाजिक छवि प्रभावित हो रही है। सूत्रों के अनुसार पुलिस ने मामले की प्रारंभिक जांच भी शुरू कर दी है, लेकिन कार्रवाई कब होगी यह अभी भी सवाल बना हुआ है। भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या यह स्वतंत्रता किसी की प्रतिष्ठा को सार्वजनिक मंच पर उछालने की छूट भी देती है? कानूनी जानकारों का मानना है कि बिना अनुमति किसी की फोटो या वीडियो सोशल मीडिया पर डालकर उसे बदनाम करना या दबाव बनाना कई परिस्थितियों में आईटी एक्ट और आपराधिक धाराओं के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। वही शिकायत करने वाले का कहना की सोशल मीडिया पर फोटो अपलोड करी उनका कहना है कि आजकल कुछ लोग सोशल मीडिया को ही अदालत मान बैठे हैं जहां आरोप भी वही लगाते हैं, फैसला भी वही सुनाते हैं और सजा भी वही तय कर देते हैं। लेकिन असली सवाल यह है कि यदि किसी निर्दोष व्यक्ति की प्रतिष्ठा को इस तरह नुकसान पहुंचता है, तो उसकी भरपाई कौन करेगा? शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो यह प्रवृत्ति और बढ़ सकती है। उनका कहना है कि सोशल मीडिया का उपयोग समाज को जागरूक करने के लिए होना चाहिए, न कि किसी की छवि खराब करने या दबाव बनाने के लिए। वैसे इस मामले में पुलिस प्रशासन को गंभीरता से दिखाते हुए।कानून के दायरे में कार्रवाई करना जरूरी है, ताकि सोशल मीडिया को व्यक्तिगत बदले की दीवार बनाने की प्रवृत्ति पर रोक लग सके। क्या सोशल मीडिया पर ‘छवि खराब करने वालों पर कानून की नजर पड़ेगी, या फिर यह डिजिटल नाटक यूं ही चलता रहेगा?
