Betul News:बिना प्रमाण, बिना फरियादी सिर्फ ‘कलम चमकाने की भूख में चरित्र हनन की फैक्ट्री बन बैठे कुछ स्वयंभू पत्रकार
बिना प्रमाण, बिना फरियादी सिर्फ ‘कलम चमकाने की भूख में चरित्र हनन की फैक्ट्री बन बैठे कुछ स्वयंभू पत्रकार

बैतूल। बैतूल स्थानीय पत्रकारिता इन दिनों एक अजीब मोड़ पर खड़ी है। न कोई प्रमाण, न कोई फरियादी फिर भी कुछ स्वयंभू पत्रकार सिर्फ अपनी पहचान कायम रखने और खबर चलाने’ की होड़ में किसी भी सरकारी तंत्र से जुड़े विभाग में सही से अपना कार्य करने वाले अधिकारी की छवि धूमिल करने से पीछे नहीं हटते। न तथ्य जुटाए जाते हैं, न संबंधित पक्ष से बात की जाती है, बस एकतरफा आरोपों पर आधारित खबर बनाकर उसकी टिकली सोशल मीडिया पर डाल दी जाती है, मानो यही उनकी असल पत्रकारिता हो।सूत्रों के अनुसार, यह वर्ग बिना किसी सत्यापन के किसी व्यक्ति या अधिकारी को निशाने पर लेकर मनगढ़ंत खबरें तैयार करता है। न घटना की पुष्टि न दस्तावेज न शिकायतकर्ता और न कोई आधिकारिक कार्रवाई इसके बावजूद ‘ब्रेकिंग’ का तमगा लगाकर खबर को पेश कर दिया जाता है जैसे यह कोई बड़ी उपलब्धि हो। इतना ही नहीं तथा कथित कुछ पैसे की लालच में किसी का मोहरा बन कर खबर को टिकली बना कर वायरल करता है!
