Betul News:खाकी को कानून का ज्ञान देने से अच्छा है, अपने क्षेत्र में विकास कार्य करने पर ध्यान दें
महिला को प्रसव के लिए खटिया पर एंबुलेंस तक ले जाना पड़ा
खाकी को कानून का ज्ञान देने से अच्छा है, अपने क्षेत्र में विकास कार्य करने पर ध्यान दें!

बैतूल , घोड़ाडोगरी विधान सभा से विधायक गंगा बाई का एक विडियो वायरल हुआ था जिसमें शाहपुर थाना परिषद में विधायक हाथी को कानून का पाठ पढ़ा रही है तो वही मैं इसकी खूब आलोचना भी हो रही है तो वहीं इसके बाद एक और सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ जहां पर सड़क नही होने के अभाव में एक गर्भवती महिला को लेने एम्बुलेंस नहीं पहुंच पाने की वजह से उस गर्भवती महिला को खाट पर लेटा कर एंबुलेंस तक ले जाया गया जिसके बाद शाहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया लेकिन वही आम जनता का कहना है कि विधायक को अपने क्षेत्र के विकास कार्यों पर ध्यान देना चाहिए, न कि पुलिस के कामों में हस्तक्षेप करना चाहिए। जनता की मांग होती है कि उनके क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं का विकास हो, न कि विधायक उन कार्यों में उलझें जो प्रशासनिक अधिकारियों के जिम्मे होते हैं। इससे विकास की दिशा में रुकावटें आती हैं और जनता की समस्याएं बनी रहती हैं। कई बार देखा गया है कि राजनेता और जनप्रतिनिधि अपने कर्तव्यों से भटक कर प्रशासनिक और कानून व्यवस्था के मामलों में दखल देते हैं। खासकर पुलिस अधिकारियों को कानून का पाठ पढ़ाने की कोशिश की जाती है, जो उनकी जिम्मेदारी नहीं है। जबकि असल में, उनकी प्राथमिकता क्षेत्र के विकास कार्यों पर होनी चाहिए।
जनता के बीच मुद्दों पर बात करना चाहिए!
नेताओं का काम कानून व्यवस्था को सुधारना या उस पर भाषण देना नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र के विकास कार्यों को बढ़ावा देना है। बुनियादी सुविधाओं, जैसे सड़कें, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव, आम नागरिकों की सबसे बड़ी समस्याएं होती हैं। इनका समाधान करना जनप्रतिनिधियों की प्रमुख जिम्मेदारी है, जिससे वे अक्सर विमुख हो जाते हैं। आप भी की विधानसभा में ग्राम पंचायत मौका माल छतरीबड़ में गर्भवती महिला को प्रसव होने के बाद किस तरह से खटिया पर ले जाया जा रहा है क्योंकि उसे ग्राम में ना तो सड़क बनी है ना ही कोई सुविधा है अगर विधायक विकास कार्य पर ध्यान दे तो यह स्थिति नहीं बनती लेकिन विधायक को तो खाकी को कानून का पाठ पढ़ना और जनता के बीच में खाकी को तार तार करने मजा आ रहा है विधायक महोदय को लगता है कि जनता के बीच में खाकी को तार-तार करने से उनकी राजनीति नही चमकेगी विधायक को तो क्षेत्र के विकास कार्य करने चाइए जिसे जनता के बीच उनकी एक अच्छी से छवि जाए ना की किसी भी शासकीय कर्मचारी को डरा धमका कर छवि ना बांए!
विकास कार्यों की उपेक्षा के परिणाम
जब नेता अपने मूल कर्तव्यों से हटकर केवल भाषणबाजी और आलोचना में समय बिताते हैं, तो इसका सीधा असर क्षेत्र के विकास पर पड़ता है। अधूरी परियोजनाएं, खराब इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी जैसे मुद्दे उभर कर आते हैं। इसके अलावा, जनता का विश्वास भी कम होता है, और राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति पैदा हो सकती है।
जनता के समाधान और सुझाव
नेताओं को चाहिए कि वे पुलिस या प्रशासन के कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप करने के बजाय अपनी ऊर्जा और समय क्षेत्र की बेहतरी में लगाएं। चाहे वह ग्रामीण इलाकों में सड़कों का निर्माण हो, शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान हो, या शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार हो, इन मुद्दों पर काम करना ही उनके वास्तविक कर्तव्य हैं।
निष्कर्ष
समाज की भलाई और प्रगति के लिए जरूरी है कि जनप्रतिनिधि अपने अधिकार क्षेत्र के विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित करें। जब नेता अपने असल कामों को प्राथमिकता देंगे, तो न केवल क्षेत्र का विकास होगा, बल्कि नागरिकों का विश्वास भी बहाल होगा।
महिला को प्रसव के लिए खटिया पर एंबुलेंस तक ले जाना पड़ा
जिले के शाहपुर ब्लॉक मुख्यालय शाहपुर से सटे लगभग 6 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत मोखा माल छतरीबढ़ में गर्भवती महिला को खटिया पर डालकर 108 वहां तक पहुंचाया ग्राम पंचायत मोखामाल के ग्राम छितरीबड़ में एक महिला को प्रसव के लिए शाहपुर शासकीय अस्पताल ले जाने के लिए खटिया पर डालकर एंबुलेंस 108 तक ले जाना पड़ा। यह घटना भाजपा के विकास के दावों की पोल खोलती है, जहां जिले के पांच विधायक और एक सांसद होने के बावजूद यह स्थिति बनी हुई है।
गांव में पक्की सड़क न होने के कारण पहले भी कई बार माताओं और बच्चों को जान गंवानी पड़ी है।यह घटना भाजपा सरकार के विकास के खोखले वादों का सच सामने लाती है। बैतूल जिले में भाजपा के पांच विधायक और एक सांसद हैं, जो कि वर्तमान में मोदी सरकार में कैबिनेट राज्य मंत्री बनाए गए हैं। बावजूद इसके गांव की सड़कें अब तक नहीं बन सकी हैं। सरकार जहां एक ओर विकास के ढोल पीट रही है, वहीं दूसरी ओर बैतूल जिले में विकास की यह तस्वीर सरकार को उनके झूठे विकास का आईना दिखा रही है। इस घटना ने एक बार फिर से यह सवाल खड़ा किया है कि क्या सच में विकास का लाभ गांवों तक पहुंच पा रहा है? क्या सरकारी योजनाएं और वादे सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गए हैं? यह घटना सरकार के दावों और वास्तविकता के बीच की खाई को स्पष्ट रूप से दिखाती है। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में इस प्रकार की मुसीबतें उत्पन्न होना आम बात हो गई है इस वीडियो के माध्यम से अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार के सारे दावे कितने सही है प्राप्त जानकारी के अनुसार इस ग्राम के ग्राम वासियों द्वारा अपनी समस्याओं को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों एवं शासन प्रशासन को अवगत कराया है परंतु हालत जस के तस बने हुए हैं। ऐसी समस्याओं को लेकर ना ही शासन प्रशासन सजग है बल्कि जनप्रतिनिधियों का ध्यान भी ग्रामीणों की जीवंत समस्याओं की ओर नहीं जा रहा है यह स्थिति सरकार के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि विकास के वास्तविक मायने क्या होते हैं और आम जनता को इन सुविधाओं से वंचित नहीं रहना चाहिए।
