Betul News:न कलेक्टर का आदेश असरदार, न नगरपालिका की जांच कारगर! आखिर खुराना के आगे बैतूल प्रशासन क्यों बेबस?

गोविंदा टॉवर में छह दिनों से कुछ परिवारों की पानी सप्लाई बंद होने का आरोप, शिकायत के बाद भी राहत नहीं; कथित अवैध कोल्ड स्टोरेज पर कार्रवाई का इंतजार, नगरपालिका की जांच और नोटिस तक सीमित होती दिख रही कार्रवाई!

न कलेक्टर का आदेश असरदार, न नगरपालिका की जांच कारगर! आखिर खुराना के आगे बैतूल प्रशासन क्यों बेबस?

गोविंदा टॉवर में छह दिनों से कुछ परिवारों की पानी सप्लाई बंद होने का आरोप, शिकायत के बाद भी राहत नहीं; कथित अवैध कोल्ड स्टोरेज पर कार्रवाई का इंतजार, नगरपालिका की जांच और नोटिस तक सीमित होती दिख रही कार्रवाई!

बैतूल में प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। आम नागरिक अपनी बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटता है, लेकिन रसूखदारों से जुड़े मामलों में कार्रवाई की रफ्तार आखिर इतनी धीमी क्यों हो जाती है? गोविंदा टॉवर का विवाद कुछ ऐसे ही सवाल खड़े कर रहा है। यहां मेंटेनेंस राशि को लेकर उपजे विवाद में कुछ परिवारों की पानी सप्लाई बंद किए जाने का आरोप है, जबकि शिकायत कलेक्टर तक पहुंचने के बावजूद प्रभावित परिवारों को अब तक राहत मिलने का दावा नहीं किया जा रहा है।पीड़ित परिवारों का आरोप है कि भूपेंद्र उर्फ बबलू खुराना, नारायण पवार और दीपक खुराना से जुड़े विवाद के चलते पिछले छह दिनों से उनके घरों में पानी की सप्लाई बंद है। बताया गया है कि मेंटेनेंस के रूप में 7,800 रुपये जमा करने को लेकर परिवारों को सात दिन का नोटिस दिया गया था, लेकिन आरोप है कि नोटिस की अवधि पूरी होने से पहले ही पानी की सप्लाई बंद कर दी गई। सवाल यह है कि मेंटेनेंस राशि को लेकर विवाद होने पर क्या परिवारों को बुनियादी सुविधा से वंचित करना उचित है? इस मामले में प्रशासन को दोनों पक्षों की बात सुनकर नियमों के अनुसार तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।शिकायत कलेक्टर तक पहुंची, फिर भी पानी के लिए परेशान परिवार पीड़ित परिवारों का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्या को लेकर कलेक्टर को शिकायत दी है, लेकिन अब तक पानी की सप्लाई बहाल नहीं हुई। ऐसे में सवाल उठता है कि जब किसी परिवार की बुनियादी जरूरत प्रभावित हो रही हो, तब प्रशासनिक हस्तक्षेप में इतनी देरी क्यों? क्या शिकायतों पर कार्रवाई के लिए भी किसी बड़े रसूख या राजनीतिक सिफारिश की जरूरत पड़ती है? हालांकि राजनीतिक संरक्षण के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है, लेकिन प्रशासन की निष्क्रियता को लेकर प्रभावित परिवारों में नाराजगी है।

कथित अवैध कोल्ड स्टोरेज पर वर्षों से सवाल, कार्रवाई अब भी अधूरी!

गोविंदा टॉवर परिसर में संचालित बताए जा रहे कोल्ड स्टोरेज को लेकर भी लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि परिसर में कई वर्षों से कोल्ड स्टोरेज संचालित है, जिसकी वजह से भवन में रहने वाले परिवारों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। पूर्व में भी जिम्मेदार नागरिकों द्वारा इस संबंध में शिकायतें किए जाने की बात सामने आई है। इसके बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने पर प्रशासन की भूमिका सवालों के घेरे में है। गोविंदा टॉवर में कई परिवार निवास करते हैं। ऐसे में भवन की सुरक्षा, अग्निशमन व्यवस्था, पार्किंग और परिसर में कथित व्यावसायिक गतिविधियों की नियमानुसार जांच जरूरी है। खास बात यह भी है कि आसपास न्यायाधीशों के आवास होने के बावजूद संबंधित विभागों की ओर से अब तक निर्णायक कार्रवाई सामने नहीं आने पर लोग सवाल उठा रहे हैं।नगरपालिका की जांच, पंचनामा और अब नोटिस… कार्रवाई कब? सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नगरपालिका के अधिकारियों ने गोविंदा टॉवर स्थित कोल्ड स्टोरेज के मामले में जांच कर पंचनामा तैयार किया था। इसके बाद अब नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। लेकिन सवाल यह है कि यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की स्थिति सामने आई है तो आगे की कार्रवाई कब होगी? कहीं ऐसा तो नहीं कि जांच, पंचनामा और नोटिस की औपचारिकताओं के बीच पूरा मामला ही ठंडे बस्ते में चला जाए?हर मंगलवार होने वाली जनसुनवाई में आम नागरिक अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं। उम्मीद रहती है कि कलेक्टर के सामने शिकायत रखने के बाद संबंधित विभागों को निर्देश मिलेंगे और समस्या का समाधान होगा। लेकिन यदि शिकायत के बाद भी परिवार छह दिनों तक पानी के लिए परेशान रहें और सुरक्षा से जुड़े मामले वर्षों तक लंबित रहें, तो जनसुनवाई की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।अब जरूरत केवल नोटिस जारी करने या जांच का आश्वासन देने की नहीं, बल्कि जमीन पर कार्रवाई दिखाने की है। कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे को संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की रिपोर्ट लेकर प्रभावित परिवारों की पानी सप्लाई तत्काल बहाल कराने तथा कोल्ड स्टोरेज, अग्नि सुरक्षा और भवन संबंधी नियमों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराने की जरूरत है।क्या बैतूल में नियम सबके लिए बराबर हैं या आम आदमी के लिए ही सख्ती और रसूखदारों के लिए सिर्फ नोटिस?

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