Fraud News:भूतपूर्व टीआई की पत्नी बनी चिटफंड कंपनी की शिकार, 5 लाख गंवाए, एसपी से की शिकायत
नागपुर के गिरोह ने बैतूल में फैलाया निवेश का जाल, पूर्व टीआई की पत्नी समेत कई लोग हुए शिकार
भूतपूर्व टीआई की पत्नी बनी चिटफंड कंपनी की शिकार, 5 लाख गंवाए, एसपी से की शिकायत
नागपुर के गिरोह ने बैतूल में फैलाया निवेश का जाल, पूर्व टीआई की पत्नी समेत कई लोग हुए शिकार

बैतूल। जिले में चिटफंड कंपनियों द्वारा आम नागरिकों के साथ की जा रही धोखाधड़ी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। अब इस ठगी का शिकार एक शिक्षित महिला हुई हैं, जो हरदा जिले में पदस्थ रहे भूतपूर्व टीआई दीवाकर उइके की पत्नी हैं। फरियादी महिला रजनी उइके ने बैतूल एसपी से शिकायत करते हुए बताया कि एजीएम कॉरपोरेशन नामक चिटफंड कंपनी ने उन्हें पांच लाख रुपए की ठगी का शिकार बना लिया है।रजनी उइके की ओर से प्रस्तुत की गई शिकायत में कंपनी के डायरेक्टर्स सुशील कोल्हे, पंकज रमेश, और अजय लधवें को नामजद किया गया है। ये सभी नागपुर, महाराष्ट्र निवासी हैं। साथ ही कंपनी से जुड़े स्थानीय मोटिवेशनल लीडर्स दिनेश कुमार टेकाम जम्बाड़ा तहसील आमला और वासुदेव वाघमारे निवासी ग्राम दनोरा बैतूल, तथा लालजी पाल निवासी इटारसी को भी दोषी बनाया गया है।शिकायत के अनुसार वर्ष 2018 में बैतूल जिले में एजीएम कंपनी ने एक मीटिंग का आयोजन किया था, जिसमें बड़ी संख्या में निवेशकों को आमंत्रित किया गया था। वहां कंपनी के डायरेक्टर्स ने अपने पुराने प्रोजेक्ट सक्सेस लाइफ मल्टीपल प्रोजेक्ट मार्केटिंग प्रा.लि. और डिजिटल एलईडी होर्डिंग प्लान की जानकारी दी थी।
कंपनी ने दिया था मोटे मुनाफे का झांसा
निवेशकों को बताया गया कि कंपनी में निवेश करने पर हर माह आकर्षक लाभांश मिलेगा, साथ ही मैच्योरिटी चेक और पासबुक भी जारी की जाएगी। कंपनी के तीनों डायरेक्टर्स द्वारा स्वयं को अनुभवयुक्त और सफल कारोबारी बताते हुए दिनेश टेकाम और वासुदेव वाघमारे से व्यक्तिगत तौर पर परिचय कराया गया, जिससे निवेशकों का कंपनी पर विश्वास और गहरा हो गया। रजनी उइके ने भी अपनी पति की मृत्यु के उपरांत प्राप्त पांच लाख रुपए की रकम को कंपनी में 18 माह के प्लान के तहत निवेश कर दिया। उन्हें पासबुक और मैच्योरिटी चेक भी दिए गए।शुरुआत में कुछ महीनों तक खाते में लाभांश की राशि आना शुरू हुई, जिससे रजनी उइके और अन्य निवेशकों का भरोसा और भी बढ़ गया। उन्होंने अपने परिचितों व रिश्तेदारों को भी कंपनी में निवेश करने के लिए प्रेरित किया। लेकिन कुछ महीनों के बाद कंपनी द्वारा लाभांश देना बंद कर दिया गया और दिए गए चेक भी बाउंस होने लगे।
झूठी स्कीमों के माध्यम से करोड़ों की ठगी
जब निवेशकों ने कंपनी के दफ्तर व डायरेक्टर्स से संपर्क करना चाहा तो सभी संपर्क बंद हो चुके थे।रजनी उइके का कहना है कि यह सिर्फ उनके साथ ही नहीं, सैकड़ों अन्य गरीब, किसान और महिलाओं के साथ भी विश्वासघात किया गया है। कंपनी ने अपनी योजनाओं और कथित मोटे मुनाफे के प्रलोभन में आम लोगों की खून-पसीने की कमाई को हड़प लिया है।शिकायत में यह भी बताया गया है कि डायरेक्टर्स और स्थानीय एजेंटों ने मिलीभगत कर लोगों से नकद व खाते के माध्यम से राशि जमा करवाई और झूठी स्कीमों के माध्यम से करोड़ों की ठगी की। अब रजनी उइके ने एसपी से मांग की है कि एजीएम कॉरपोरेशन के सभी आरोपितों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर कार्रवाई की जाए और पीड़ितों की रकम वापस दिलाई जाए।
