Crime News:कानून के बिना इंसाफ़… या इंसाफ़ के बिना कानून?
शक पर सज़ा कानून को ताक पर, आदिवासी युवक की बेरहम पिटाई
कानून के बिना इंसाफ़… या इंसाफ़ के बिना कानून?
शक पर सज़ा कानून को ताक पर, आदिवासी युवक की बेरहम पिटाई!

बैतूल ज़िले में आदिवासियों के साथ हो रही मारपीट की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताज़ा मामला भैंसदेही थाना क्षेत्र के पोखरनी गांव का है, जहां एक आदिवासी ड्राइवर को उसके ही मालिक ने चोरी के आरोप में बेरहमी से पीटा। पूरी घटना पास की किराना दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। जिससे ऐसा लगता है कि जिले में कानून को ताक पर रखकर “खुद ही न्याय” करने की प्रवृत्ति अब खतरनाक मोड़ पर है। भैसदेही से एक मामला रोंगटे खड़े कर देने वाला है एक आदिवासी युवक को सिर्फ इस शक में बेरहमी से पीटा गया कि क्यों कि उस पर शक है कि गेहूं चोरी किया है।अगर किसी पर चोरी का शक था, तो कानूनी प्रक्रिया छोड़कर हिंसा करना कब से सही हो गया? क्या मारने वाले को यह हक है कि वह खुद अदालत, वकील और जल्लाद बन जाए?सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है
कि युवक को लगातार पीटा जा रहा है। किसी ने बीच-बचाव करने की कोशिश नहीं की, मानो कानून की कोई अहमियत ही न रह गई हो। जैसे कि पुलिस और प्रशासनिक का लोगो के मन में कोई डर ही नहीं है।जानकारी के अनुसार, बगदरा गांव निवासी अजय बारस्कर, आरोपी अंकित राठौर के पास ड्राइवरी का काम करता था। आरोप है कि अंकित राठौर ने अजय पर गेहूं चोरी का आरोप लगाकर लात-घूंसों और थप्पड़ों से बुरी तरह मारपीट की।घटना के बाद आरोपी ने पीड़ित के खिलाफ ही थाने में शिकायत दर्ज करा दी। या फिर ये कहना गलत नहीं होगा कि कानून के बिना इंसाफ़ खुद ही कर लो ओर कानून को अपने हाथ में ले लो क्यों कि डर तो कानून का बचा ही नहीं या फिर इंसाफ़ के बिना कानून चल रहा है! वैसे गलती कानून की नहीं कानून को कमजोर करने वाले नेता और सरकार की है।
