Betul News:वर्दी का अपमान कानून-व्यवस्था पर सीधा हमला!
पाथाखेड़ा चौकी प्रभारी क्यों टारगेट?
वर्दी का अपमान कानून-व्यवस्था पर सीधा हमला!
बैतूल पुलिसिंग की पहचान रही है सख़्ती, अनुशासन और निष्पक्ष कार्रवाई। अपराधी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, क़ानून से ऊपर नहीं। लेकिन पिछले दिनों हुई कुछ घटनाओं ने इस छवि पर धुंध डालने का काम किया है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह धुंध बाहर से नहीं, बल्कि स्थानीय दबाव और छूट-भैया राजनीति से पैदा की जा रही है।कुछ दिन पहले हाईवे पर एक तेज़ रफ़्तार ट्रक ने 10–12 मवेशियों को कुचल डाला। हादसे के बाद लोगों में आक्रोश फैल गया। मौके पर पहुंची पुलिस घटना की जानकारी लगने पर पहुंची थी। तभी वहां मौजूद एक नेता ने अपनी नेतागिरी चमकाने के चक्कर में पुलिस को अब शब्द बोलने लग गए। हालांकि घटना की गंभीरता समझते हुए वहां पर मौजूद पुलिसकर्मी और चौकी प्रभारी एवं एसडीओपी ने संयम का परिचय देते हुए स्थिति को संभाला, वही पुलिस ने बिना देर किए कार्रवाई की और चंद घंटों में ट्रक चालक को पकड़ लिया। यह कार्रवाई तेज़ और निष्पक्ष थी, जिसने दिखा दिया कि पुलिसिंग अब भी सतर्क है। इसके बावजूद भीड़ में मौजूद स्थानीय नेता पुलिस पर ही बरस पड़े। चौकी प्रभारी को खुलेआम अपमानित किया गया। सवाल यह है कि जिन नेताओं को सड़क पर छोड़े गए मवेशियों की इतनी चिंता थी, उन्होंने पहले ही पशुपालकों को क्यों नहीं चेताया? पुलिस तो अपना काम कर रही थी। मगर यहां मंशा साफ दिखी भीड़ के सामने अपनी नेतागिरी चमकाना था!
पाथाखेड़ा चौकी प्रभारी क्यों टारगेट?
जागरूक नागरिक पूछ रहे हैं आख़िर बार-बार पाथाखेड़ा चौकी प्रभारी को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है? क्या वजह यह है कि सख़्त कार्रवाई के कारण कुछ लोगों के अवैध कामों में रुकावट आ रही है? चर्चा यह भी है कि प्रभारी की छवि बिगाड़ कर उन्हें यहां से हटवाने की कोशिश हो रही है, ताकि अवैध गतिविधियों को फिर से पनाह मिल सके। पुलिस की वर्दी सिर्फ एक ड्रेस नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था का प्रतीक है। जब सार्वजनिक मंच पर किसी अधिकारी को गालियाँ दी जाती हैं, तो यह सीधे तौर पर कानून-व्यवस्था पर हमला है। जागरूक नागरिकों का कहना है कि ऐसे लोगों पर सख़्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि दोबारा कोई वर्दी का अपमान करने की हिम्मत न जुटा सके।
बड़ा सवाल
क्या पुलिस को पूरी मज़बूती से काम करने दिया जा रहा है, या फिर कुछ लोगों द्वारा वर्दी को लगातार बदनाम करने की कोशिशें जारी हैं?अगर पुलिस को ही दबाव में लाकर कमजोर किया जाएगा, तो अपराधियों का हौसला और बढ़ेगा। और तब “बैतूल पुलिसिंग” का वह नाम, जो कभी अपराधियों के लिए खौफ़ और जनता के लिए भरोसा था, सिर्फ अतीत की कहानी बनकर रह जाएगा। वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है लेकिन उस वीडियो में पुलिस को बदनाम करने की बात बताई गई लेकिन इसकी अलग ही सच्चाई है।
