Betul News:दुख पर सेल्फी का साया बैतूल में संवेदनाओं से ज्यादा सोशल मीडिया का दिखावा हावी

दुख पर सेल्फी का साया बैतूल में संवेदनाओं से ज्यादा सोशल मीडिया का दिखावा हावी!

बैतूल।जिले में इन दिनों एक चिंताजनक ट्रेंड तेजी से सामने आ रहा है। किसी भी दुखद घटना या शोकग्रस्त परिवार के यहां पहुंचने के बाद संवेदना व्यक्त करने के बजाय कुछ लोग वहां फोटो खींचकर सोशल मीडिया पर अपलोड करने में ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं। मानो दुख बांटना नहीं, बल्कि अपनी मौजूदगी दिखाना ही उनका उद्देश्य बन गया हो।परंपरागत रूप से शोकग्रस्त परिवार के पास जाना संवेदना व्यक्त करने और उन्हें मानसिक सहारा देने का प्रतीक माना जाता है। लेकिन अब यह परंपरा धीरे-धीरे सोशल मीडिया पोस्ट में बदलती नजर आ रही है। लोग दुखी परिवार के साथ खड़े होकर फोटो लेते हैं और उसे फेसबुक, व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर अपनी पहचान और सक्रियता दिखाने की कोशिश करते हैं। पढ़े लिखे भी भूल रहे मर्यादा सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस तरह की हरकतें केवल अनजान लोगों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज के पढ़े-लिखे और जिम्मेदार माने जाने वाले लोग भी इसमें शामिल दिख रहे हैं। यह व्यवहार न केवल असंवेदनशीलता दर्शाता है, बल्कि सामाजिक मर्यादाओं को भी ठेस पहुंचाता है। बैतूल में उभरता यह ट्रेंड सिर्फ एक स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि बदलती सामाजिक सोच का संकेत है। अब समय है कि लोग खुद से सवाल करें क्या हम सच में किसी के दुख में साथ देने जा रहे हैं या सिर्फ एक पोस्ट के लिए?इस तरह के व्यवहार से सबसे ज्यादा असर उस परिवार पर पड़ता है, जो पहले से ही गहरे दुख में होता है। उनकी भावनाओं को समझने के बजाय उन्हें फोटो फ्रेम में कैद कर सार्वजनिक करना उनकी निजता और सम्मान दोनों को ठेस पहुंचाता है। कई लोग इसे लेकर अंदर ही अंदर असहज महसूस करते हैं, लेकिन सामाजिक दबाव के चलते कुछ कह नहीं पाते।आज के दौर में संवेदनाएं भी मानो डिजिटल पैमाने पर मापी जाने लगी हैं। किसकी पोस्ट पर कितने लाइक्स आए, कितने लोगों ने प्रतिक्रिया दी यही अब “सक्रियता” का पैमाना बनता जा रहा है। ऐसे में किसी के दुख में शामिल होना भी एक “सोशल अपडेट” भर बनकर रह गया है।

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