Education News:बैतूल के सरकारी स्कूलों में अव्यवस्था: शिक्षक गायब, समय से पहले हो रही छुट्टी!
बैतूल के सरकारी स्कूलों में अव्यवस्था: शिक्षक गायब, समय से पहले हो रही छुट्टी!

बैतूल,बच्चों की आंखों में सपने हैं, पर स्कूलों में शिक्षक नहीं!”बैतूल में शिक्षा का ये हाल क्यों? जब दोपहर 1 बजे स्कूल बंद हो जाए और कोई पूछने वाला कोई नहीं।जहां एक ओर मध्य प्रदेश सरकार “स्कूल चलें हम” जैसे अभियानों के ज़रिए बच्चों को स्कूलों में लाने के लिए जागरूकता फैला रही है, वहीं दूसरी ओर बैतूल जिले के ग्रामीण इलाकों में स्थित सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत सरकार के दावों की पोल खोल रही है।ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं कि अधिकांश सरकारी स्कूल दोपहर 1 बजे तक ही खुलते हैं और उसके बाद शिक्षकों द्वारा स्कूल बंद कर दिया जाता है। बच्चों को बिना किसी ठोस कारण के समय से पहले घर भेज दिया जाता है। इससे न केवल बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बल्कि शिक्षा के अधिकार जैसे महत्वपूर्ण कानूनों की भी धज्जियाँ उड़ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शिक्षक अपनी मनमर्जी से स्कूल खोलते और बंद करते हैं। समय पर न पढ़ाना, जल्दी छुट्टी कर देना और कई बार स्कूल में मौजूद ही न रहना आम बात हो चुकी है। अधिकारियों की ओर से नियमित निरीक्षण नहीं होने के कारण शिक्षकों को खुली छूट मिल गई है।जब इस विषय में आठनेर क्षेत्र के बीआरसी (ब्लॉक रिसोर्स कोऑर्डिनेटर) राजेश आठनेरे से संपर्क किया गया तो उन्होंने पहले तो टालमटोल करते हुए कहा कि “मैने बुलाया था।” जब उनसे दोबारा सवाल किया गया कि किस कार्य के चलते स्कूल दोपहर में ही बंद करवाया गया, तो उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया और बहाने बनाने लगे।स्कूलों में हो रही इस लापरवाही का सबसे बुरा असर उन बच्चों पर पड़ रहा है जो दूर-दराज के इलाकों से शिक्षा प्राप्त करने आते हैं। कुछ बच्चों के माता-पिता ने बताया कि वे अपने बच्चों को पूरे दिन स्कूल में पढ़ने के लिए भेजते हैं, लेकिन बच्चे दोपहर 1 बजे ही वापस लौट आते हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई में भारी नुकसान हो रहा है।अब बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या सरकार और शिक्षा विभाग ऐसे गैर-जिम्मेदार शिक्षकों पर कोई ठोस कार्रवाई करेगा? या फिर “स्कूल चलें हम” जैसे अभियान सिर्फ कागजों में ही सिमटकर रह जाएंगे? जब तक अधिकारी ज़मीनी स्तर पर जाकर स्थिति का जायजा नहीं लेंगे और लापरवाह शिक्षकों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, ये कहना गलत नहीं होगा कि बच्चों की शिक्षा के साथ किस तरह का मज़ाक किया जा रहा है।
