Betul News:बंद पड़े बायोगैस प्लांट को हाईस्कूल छात्रा दीवा डागा ने कराया पुनर्जीवित, 11 परिवारों की रसोई में पहुंची मुफ्त गैस

एक साल की मेहनत से 25 साल पुराने प्लांट को फिर किया शुरू

बंद पड़े बायोगैस प्लांट को हाईस्कूल छात्रा दीवा डागा ने कराया पुनर्जीवित, 11 परिवारों की रसोई में पहुंची मुफ्त गैस

एक साल की मेहनत से 25 साल पुराने प्लांट को फिर किया शुरू


बैतूल। एक साल पहले गांव की महिला को धुएं से भरे चूल्हे पर खाना बनाते देखा तो हाईस्कूल छात्रा दीवा डागा के मन में सवाल उठा कि जब गांव में पशुधन और गोबर उपलब्ध है तो रसोई में महंगा गैस सिलेंडर क्यों इस्तेमाल किया जाए। इसी सोच के साथ उन्होंने गांव में वर्षों से बंद पड़े बायोगैस प्लांट को दोबारा शुरू कराने का बीड़ा उठाया। तकनीकी जानकारी जुटाई, विशेषज्ञों से सलाह ली और करीब एक साल की मेहनत के बाद प्लांट को फिर चालू करा दिया। अब इससे पारसोड़ा गांव के 11 परिवारों की रसोई में मुफ्त बायोगैस पहुंच रही है।
दीवा जब करीब एक वर्ष पहले पारसोड़ा गांव पहुंचीं तो उन्होंने एक महिला को पारंपरिक चूल्हे पर खाना बनाते देखा। एलपीजी सिलेंडर का इस्तेमाल नहीं करने का कारण पूछने पर महिला ने आर्थिक परेशानी बताई। इसके बाद दीवा ने गांव की स्थिति को समझना शुरू किया। उन्होंने देखा कि उनके खेत में करीब 50 गाय-बैल हैं और गोबर का उपयोग मुख्य रूप से खेती में किया जा रहा है। इसी दौरान उन्हें खेत में 25 साल पुराना बायोगैस प्लांट मिला, जो लंबे समय से बंद था।
दीवा ने प्लांट को दोबारा शुरू करने का फैसला किया। उन्होंने बायोगैस तकनीक पर शोध किया और स्थानीय विशेषज्ञों से सलाह लेकर प्लांट के पुनर्निर्माण की योजना बनाई। खराब हो चुके पुराने टैंक को हटाकर 9 फीट का नया बायोगैस टैंक तैयार कराया गया। डाइजेस्टर, इनलेट और आउटलेट सिस्टम की मरम्मत व फैब्रिकेशन कराया गया। करीब 500 मीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन को भी दुरुस्त किया गया, ताकि गैस घरों तक पहुंचाई जा सके। प्लांट के पुनर्निर्माण के दौरान दीवा ने प्रोजेक्ट मैनेजर, पाइपलाइन ठेकेदारों और मजदूरों के साथ समन्वय किया और पूरे काम की निगरानी की। मौसम की वजह से काम में रुकावट भी आई, लेकिन परिस्थितियां अनुकूल होने के बाद बाकी स्थापना का काम पूरा कराया गया।

19 मई 2026 को हुआ शुभारंभ

19 मई 2026 को प्लांट का औपचारिक शुभारंभ किया गया। अब गाय के गोबर और पानी के मिश्रण से बायोगैस तैयार हो रही है। इससे 11 परिवार खाना पका रहे हैं और किसी परिवार से सर्विस चार्ज या गैस का शुल्क नहीं लिया जा रहा है।दीवा डागा का कहना है कि महंगाई के दौर में यदि किसी परिवार की रसोई बिना अतिरिक्त आर्थिक बोझ के जल सके तो इससे बड़ी संतुष्टि नहीं हो सकती। इस पहल से ग्रामीण परिवारों को किफायती ऊर्जा मिलने के साथ पशुपालन से निकलने वाले गोबर का उपयोग भी हो रहा है। दीवा ने अपनी सोच और करीब एक साल की मेहनत से बंद पड़े प्लांट को फिर शुरू कराकर गांव में स्वच्छ ऊर्जा की नई मिसाल पेश की है।

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