Betul News:खाकी ने फिर निभाया इंसानियत का फर्ज, चलती ट्रेन में वन रक्षक की बिगड़ी तबीयत तो होमगार्ड सैनिक ने संभाली कमान
मलमझिरी के पास सीने में दर्द से बिगड़ी हालत, जयपुर एक्सप्रेस में सफर कर रहे सैनिक 179 दिनेश देवले ने बिना देर किए दिया CPR
खाकी ने फिर निभाया इंसानियत का फर्ज, चलती ट्रेन में वन रक्षक की बिगड़ी तबीयत तो होमगार्ड सैनिक ने संभाली कमान
मलमझिरी के पास सीने में दर्द से बिगड़ी हालत, जयपुर एक्सप्रेस में सफर कर रहे सैनिक 179 दिनेश देवले ने बिना देर किए दिया CPR

बैतूल। खाकी वर्दी सिर्फ कानून-व्यवस्था और सुरक्षा की पहचान नहीं, बल्कि जरूरत की घड़ी में इंसानियत के साथ खड़े होने का भी नाम है। इसकी मिसाल चलती ट्रेन में उस समय देखने को मिली, जब एक वन रक्षक की अचानक तबीयत बिगड़ गई और ट्रेन में सफर कर रहे होमगार्ड सैनिक 179 दिनेश देवले ने बिना देर किए मदद के लिए आगे बढ़कर CPR सहित प्राथमिक सहायता दी जानकारी के अनुसार बैतूल वन विभाग में पदस्थ वन रक्षक बाबूजी ट्रेन से अपने घर जा रहे थे। मलमझिरी के पास अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें सीने में तेज दर्द और बेचैनी महसूस हुई। स्थिति गंभीर नजर आने पर यात्रियों में चिंता का माहौल बन गया। उन्हें हार्ट अटैक की आशंका जताई गई, इसी दौरान जयपुर एक्सप्रेस में बैतूल से खंडवा की ओर यात्रा कर रहे होमगार्ड सैनिक 179 दिनेश देवले ने स्थिति को समझा और तत्काल मदद के लिए आगे आए। उन्होंने घबराए बिना वन रक्षक को प्राथमिक सहायता दी और CPR किया। इसके बाद वन रक्षक की हालत में सुधार आने की बात सामने आई।दिनेश देवले की यह पहल इसलिए भी खास रही क्योंकि वह उस समय ड्यूटी पर तैनात नहीं थे, बल्कि स्वयं यात्री के रूप में सफर कर रहे थे। इसके बावजूद खाकी वर्दी से जुड़ी जिम्मेदारी और मानवीय संवेदना ने उन्हें संकट में पड़े व्यक्ति की मदद करने के लिए प्रेरित किया।आपात स्थिति में कुछ पल बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे समय में दिनेश देवले ने जिस तत्परता, संयम और साहस का परिचय दिया, वह खाकी वर्दी की सकारात्मक तस्वीर सामने लाता है। उन्होंने यह संदेश दिया कि वर्दी की असली ताकत सिर्फ अधिकार में नहीं, बल्कि जरूरतमंद के लिए समय पर मदद का हाथ बढ़ाने में भी है।चलती ट्रेन में सीमित संसाधनों के बीच CPR और प्राथमिक सहायता देना आसान नहीं था, लेकिन सैनिक ने स्थिति से घबराने के बजाय अपनी समझ और प्रशिक्षण का इस्तेमाल किया। उनकी इस पहल की यात्रियों ने भी सराहना की।एक तरफ ट्रेन अपनी रफ्तार से दौड़ रही थी, दूसरी तरफ एक यात्री की तबीयत बिगड़ रही थी। ऐसे वक्त में खाकी का एक जवान आगे आया और इंसानियत को सबसे पहले रखा। होमगार्ड सैनिक दिनेश देवले की यह तत्परता निश्चित तौर पर सराहना के योग्य है। एक बार फिर बताती है कि खाकी केवल वर्दी नहीं कर्तव्य, साहस, संवेदना और इंसानियत की पहचान भी है।
