Betul News:सीएमएचओ की कार्यशैली पर सवाल: भैंसदेही बीएमओ को बचाने और रिश्वत के आरोपी को पदस्थ करने का मामला
सीएमएचओ की कार्यशैली पर सवाल: भैंसदेही बीएमओ को बचाने और रिश्वत के आरोपी को पदस्थ करने का मामला

बैतूल जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. रविकांत उइके की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उनकी ओर से भैंसदेही के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) की लापरवाही के बावजूद उसे बचाने और रिश्वतखोरी में लिप्त एक कर्मचारी को पदस्थ करने की खबरें सामने आ रही हैं।
भैंसदेही बीएमओ का मामला
भैंसदेही की बीएमओ बिना किसी को सूचित किए अपने कार्य क्षेत्र से बाहर चली गई थीं, और उनके हरदा में हुए एक हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। इसके बावजूद, सीएमएचओ ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। विभागीय सूत्रों के अनुसार, बीएमओ को बचाने के लिए भारी रिश्वत की पेशकश की गई थी। यह आरोप लगाया जा रहा है कि बीएमओ ने अपने पद पर बने रहने के लिए बड़ी रकम चुकाई थी, और सीएमएचओ ने भी इस मामले में कार्रवाई करने के बजाय उन्हें संरक्षण दिया।
लोकायुक्त द्वारा पकड़े गए कर्मचारी की नियुक्ति
एक अन्य मामले में, सीएमएचओ ने रिश्वत लेते पकड़े गए एक कर्मचारी अखिलेश मालवी को कार्यालय में शिकायत शाखा में पदस्थ कर दिया। यह तब हुआ जब लोकायुक्त द्वारा मालवी पर पहले से ही मामला लंबित था। शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि ऐसे कर्मचारियों को महत्वपूर्ण और संवेदनशील पदों से दूर रखा जाए। सीएमएचओ ने यह स्वीकार किया कि यह आदेश गलती से जारी हुआ था, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करते समय ध्यान नहीं दिया।
प्रशासनिक निर्देश और नियमों का उल्लंघन
सामान्य प्रशासन विभाग ने 2012 में एक आदेश जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि लोकायुक्त या अन्य सतर्कता एजेंसियों द्वारा पकड़े गए कर्मचारियों को संवेदनशील पदों से हटाया जाए। इसके बावजूद, सीएमएचओ ने बिना किसी उच्च अधिकारी या प्रभारी मंत्री की अनुमति के अपने स्तर पर आदेश जारी कर दिया।
