Betul News:इस बार न हो बेसमेंट पर “सेटलमेंट’ : शहर की ट्रैफिक व पार्किंग समस्या का मूल कारण ही बेसमेंट का कमर्शियल उपयोग

जिला प्रशासन को नगर पालिका का साथ बेहद जरूरी, निगम ने ही दे रखी है व्यावसायिक कामकाज की अनुमति

इस बार न हो बेसमेंट पर “सेटलमेंट’ : शहर की ट्रैफिक व पार्किंग समस्या का मूल कारण ही बेसमेंट का कमर्शियल उपयोग

जिला प्रशासन को नगर पालिका का साथ बेहद जरूरी, निगम ने ही दे रखी है व्यावसायिक कामकाज की अनुमति

बैतूल। उम्मीद है इस बार बेसमेंट पर कोई “सेटलमेंट” नहीं होगा। ये पूरी तरह पार्किंग के लिए मुक्त किए जाएंगे। इन्हीं बेसमेंट में शहर के बेतरतीब ट्रैफिक व पार्किंग की विकराल समस्या का समाधान छुपा हुआ है, लेकिन यही बेसमेंट सरकारी भ्रष्टाचार के कारण छुपे हुए हैं। सरकारी महकमों की परस्पर मिलीभगत का नतीजा दिल्ली ने हाल ही में भुगता है। क्या बैतूल भी उस दिन का इंतजार कर रहा है जब उसके माथे पर दिल्ली जैसा कलंक लगे? नहीं न, तो फिर बेसमेंट को लेकर कलेक्टर महोदय कब सख्ती से पालन करवाएंगे जो बेसमेंट में व्यवसाय कर रहे हैं उन पर कार्रवाई कर बेसमेंट खाली व्यापारियों से करवाना चाहिए। शहर हित की इस मुहिम को इस बार कोई दबाव-प्रभाव प्रभावित न कर पाए। इसकी जिम्मेदारी कलेक्टर के साथ साथ डॉ. मोहन यादव सरकार, नगरीय प्रशासन की भी है। तो वही जनता के द्वारा चुने हुए जनप्रतिनिधियों पर भी है जिनकी शह पर बेसमेंट पार्किंग की जगह कमाई का जरिया बने हुए हैं। नई इमारत बनी नहीं कि उसके बेसमेंट पहले तैयार होकर कमर्शियल उपयोग के लिए बिक जाते हैं, क्योंकि जिम्मेदार बिक जाते हैं। जनता जाए भाड़ में और शहर रोता रहे पार्किंग, ट्रैफिक के नाम पर। बिकने वालों अफसर पर भी बैतूल कलेक्टर ने कार्रवाई करनी चाहिए जो बिना जांच नक्शे को पास कर दिया जाता है।बेसमेंट में कांपलेक्स स्वामियों ने स्वीकृत मानचित्र से हटकर अवैध रूप से दुकानों का निर्माण करा लिया है। कई जगहों पर गोदामों का संचालन किया जा रहा है या फिर पार्किंग छोड़कर अन्य कामों में उपयोग किया जा रहा है, जिससे स्थिति यह है कि खरीदारी करने के लिए आए ग्राहक कांप्लेक्स व दुकानों के बाहर सड़कों पर वाहन खड़ा करते हैं। पार्किंग नहीं होने की वजह से ग्राहकों को सड़क पर वाहन खड़े करने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे यातायात बाधित हो रहा है और नागरिकों को समस्या उत्पन्न हो रही है।नगरपालिका से उन्होंने अपने बेसमेंट के लिए किस बात की अनुमति ली है इसकी यदि जांच हो जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। अपने संभावित नुकसान को देखते हुए पार्किंग का उपयोग कर दुकानों का व्यवसायिक उपयोग करने वाले व्यापारी विधायक का सहारा ले रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि शासन के आदेश का अधिकारी पालन नहीं करते हैं तो वे खुद कटघरे में खड़े हो जाएंगे। यदि भविष्य में तेज बारिश के बाद शहर में आधा सैकड़ा से अधिक बेसमेंट में जलभराव जैसी स्थिति निर्मित हुई और कोई जनहानि होती है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा? कह पाना मुश्किल है।

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