Betul News:आमला विधायक डॉ योगेश पंडाग्रे क्या उनकी विधानसभा के पीड़ित महिला को न्याय दिला पाएंगे ?
प्रसूता को ऑपरेशन से हुई लड़की,लापरवाही की हद पेट मे छोड़ा हैंडटॉवेल,
आमला विधायक डॉ योगेश पंडाग्रे क्या उनकी विधानसभा के पीड़ित महिला को न्याय दिला पाएंगे ?
प्रसूता को ऑपरेशन से हुई लड़की,लापरवाही की हद पेट मे छोड़ा हैंडटॉवेल,
पेटदर्द की शिकायत के बाद इलाज के लिए लाए प्राइवेट हॉस्पिटल में डॉ ने ऑपरेशन से कपड़ा निकाला

मध्यप्रदेश के बैतूल में जिला चिकित्सालय लगातार विवादों में बना हुआ है प्रसूताओं की मौत का अड्डा बना हुआ है लगातार हो रही मौतों और सीएस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे लाखो सवाल आखिर क्यों कोई कार्यवाही नही होती सीएस डॉ अशोक बारंगा वाकई कोई कार्यवाही करेंगे या फिर इनकी फाइल भी बंद कर दी जाएगी सीएस बनने के बाद से ही लगातार आ रहे है नए नए मामले सामने प्रसूताओं की मौत के मामले तो थे ही रिश्वत कांड के बाद भी कोई कार्यवाही नही होना सूत्रों की माने तो किसी बड़े नेता का हाथ है सीएस पर यही कारण है वही जिला चिकित्सालय मै लगातार लापरवाई बरती जा रही है और उन लापरवाही पर पर्दा डालने के लिए प्रशासनिक अधिकारी लगे हुए जिला अस्पताल में कई ऐसे मामले हो गए जहा पर मरीज की जान पर भी बन आई है उसके बाजूद अधिकारियों द्वारा जांच के नाम पर मामले को रफा दफा कर दिया जाता है हाल ही में कुछ दिनों पहले का मामल है जहा आमला जनपद अंतर्गत आने वाले ग्राम जम्बाड़ा निवासी प्रसूता डिलेवरी के लिए जिला चिकित्सालय में 28,06,2024,को भर्ती हुई थी और उसने सीजर से 29,06,2024, को एक बेटी को जन्म दिया था पर सीजर के दौरान हुई लापरवाही के चलते महिला को पेट मे दर्द की शिकायत शुरू हो गई उसके बाद उसे फिर से जिला चिकित्सालय में भर्ती किया गया बिना किसी जांच के प्रसूता को पेटदर्द की दवाएं देकर उसे 3 दिन में डिस्चार्ज कर दिया गया वहा पर भी स्टाप की लापरवाही सामने आई प्रसूता को दोबारा 13 तारीख को एडमिट किया गया था 16 तारीख को अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया था मगर डिस्चार्ज पेपर में 16 तारीख को एडमिट और 13 तारीख को डिस्चार्ज बनकर दिया गया इतनी लापरवाही आखिर क्यों है जिला चिकित्सालय में क्या कारण है जब प्रसूता को दर्द दोबारा उठा तब उसके बाद परिजनों ने महिला को निजी अस्पताल में भर्ती कराया था जहाँ जांच के बाद आंतो में सूजन होना बताया गया था जब महिला का ऑपरेशन किया गया तो चैतन्य अस्पताल के डॉ पेंड्राम भी उस वक्त हैरान हो गए कि आंते सीजर के बाद से आपस मे चिपकी हुई है और उसकी छोटी आंत में एक हैंड टॉवल फसा पाया गया था जिसे निकाला गया
डॉ ने बताया कि कपड़ा नही निकाला जाता तो महिला की जान भी जा सकती थी
इस तरह की लापरवाही जिला चिकित्सालय में होना डॉक्टर्स की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर रही है अब देखना यह होगा इस पूरे मामले में विधायक हेमंत पंडाग्रे एक डॉक्टर भी है डॉक्टर को भगवान का दर्जा दिया गया है पीड़ित परिवार को क्या न्याय दिलाने में मदद करेंगे या फिर इन धन्य सेठों के आगे गरीब परिवारों की नहीं सुनी जाएगी वही दोषी डॉक्टर्स पर जिले के तेजतर्रार माने जाने वाले कलेक्टर क्या कार्यवाही करते है । प्रसूता को वाकई न्याय मिलेगा या फिर फाइल यूं ही दबा दी जाएगी प्रसूता के परिजनों ने जिला कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी से न्याय की उम्मीद की है
