Betul News:पुलिस कंट्रोल रूम में प्रदीपन संस्थान द्वारा बाल श्रम, बाल दुर्व्यापार की रोकथाम पर आयोजित की गई एक दिवसीय कार्यशाला
पुलिस कंट्रोल रूम में प्रदीपन संस्थान द्वारा बाल श्रम, बाल दुर्व्यापार की रोकथाम पर आयोजित की गई एक दिवसीय कार्यशाला

बैतूल। पुलिस कंट्रोल रूम बैतूल में आज दिनांक को प्रदीपन संस्थान द्वारा एक महत्वपूर्ण एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय “बाल श्रम, बाल दुर्व्यापार की रोकथाम हेतु सांझी रणनीति” था। इस अवसर पर सचिव महोदय विधिक सेवा प्राधिकरण बैतूल, पुलिस अधीक्षक महोदय बैतूल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महोदय बैतूल,डिस्ट्रिक्ट लीगल ऐड ऑफिसर, प्रदीपन संस्थान सदस्य (दीपमाला), श्रम विभाग के अधिकारी ,स्वास्थ्य विभाग,सरपंच तथा वन स्टॉप सेंटर की प्रभारी ,पुलिस अधिकारियों सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे कार्यशाला का शुभारंभ स्वागत एवं परियोजना परिचय के साथ हुआ, जिसके बाद बाल दुर्व्यापार पर एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। इस दौरान पुलिस की भूमिका एवं सहयोग, पीड़ित बच्चों के लिए विधिक सेवाओं की जानकारी, बाल श्रम एवं किशोर श्रम से बचाव तथा पुनर्वास योजनाओं पर गहन चर्चा की गई। वन स्टॉप सेंटर की भूमिका पर भी विशेष ध्यान दिया गया।पुलिस अधीक्षक बैतूल श्री निश्चल झारिया ने अपने संबोधन में कहा कि बाल अपराधों की रोकथाम में विभागीय समन्वय अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने सभी विभागों से त्वरित कार्रवाई और निरंतर संपर्क बनाए रखने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने बताया कि पुलिस विभाग इस दिशा में सभी आवश्यक सहयोग प्रदान करेगा कार्यशाला में बाल विवाह की रोकथाम पर विशेष जोर दिया गया। यह स्पष्ट किया गया कि कानून के अनुसार लड़कियों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 18 वर्ष एवं लड़कों के लिए 21 वर्ष है। किसी भी प्रकार के बाल विवाह की सूचना पुलिस हेल्पलाइन (100) या चाइल्ड लाइन (1098) पर तत्काल दी जा सकती है।साथ ही विधिक सेवा हेल्पलाइन नंबर (15100) के बारे में जानकारी दी।“बाल विवाह मुक्त भारत” (CHILD MARRIAGE FREE INDIA) अभियान के तहत जन जागरूकता, स्कूल-आधारित कार्यक्रम और ग्राम स्तरीय निगरानी समितियों के गठन की योजना बनाई गई। समाज के सभी वर्गों से अपील की गई है कि वे बाल अपराधों की रोकथाम में सक्रिय भूमिका निभाएं। यह भी स्पष्ट किया गया कि सूचनादाता की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी।भविष्य में नियमित समीक्षा बैठकें, मासिक प्रगति रिपोर्ट और क्षेत्रीय स्तर पर समन्वय समितियों के माध्यम से इस अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। कार्यशाला में यह निर्णय लिया गया कि सभी संबंधित विभाग मिलकर बाल अपराधों की रोकथाम के लिए एक सुदृढ़ तंत्र विकसित करेंगे।
