High Court Stoppage:50 लाख रुपए की वसूली के लिए परिवाद दायर, हाई कोर्ट ने सुनवाई पर लगाई रोक बेहिसाब धन वसूली का मामला
50 लाख रुपए की वसूली के लिए परिवाद दायर, हाई कोर्ट ने सुनवाई पर लगाई रोक बेहिसाब धन वसूली का मामला

बैतूल। राजेंद्र वार्ड, बैतूल गंज निवासी महेश आहूजा, मुकेश आहूजा, सुरेश आहूजा, किरण आहूजा और रोशनी आहूजा ने गोठी कॉलोनी निवासी अक्षय तातेड़ के खिलाफ 50 लाख रुपए की वसूली के लिए परक्राम्य लिखित अधिनियम 1881 की धारा 138 के तहत परिवाद दाखिल किया है। इस मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने आरोपी की याचिका स्वीकार करते हुए निचली अदालत में चल रही सुनवाई पर रोक लगा दी है। बचाव पक्ष ने लेनदेन से इनकार करते हुए चेक के दुरुपयोग का मामला बताया है।परिवाद में बताए गए लेनदेन से आयकर कानून के प्रावधानों का उल्लंघन होता है।
यह है मामले का मूल विवाद
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परिवादियों ने दावा किया कि आरोपी अक्षय तातेड़ ने उधारी रकम के लिए एक इकरारनामा किया था। हालांकि, यह रकम बैंक खातों के जरिए लेनदेन के बजाय हाथ उधारी के रूप में दी गई थी। विवादित इकरारनामी का गवाह गणेश अमझरे है। गणेश इकरारनामा में केवल चेक के लेनदेन का गवाह है, इकरारनामा विवादित है। बचाव पक्ष लेनदेन से इनकार कर रहा है।हाई कोर्ट जबलपुर में आरोपी अक्षय तातेड़ की ओर से अधिवक्तागण भारत सेन और संजय चौरसे ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर यह तर्क दिया कि यह धन बेहिसाब है, रकम का लेनदेन अवैध है और आयकर कानून के तहत इसे वैध नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने यह सवाल उठाया कि अगर यह रकम आयकर कानून के तहत अवैध है, तो इसे चेक बाउंस कानून के जरिए वसूलने की अनुमति क्यों दी जाए।
हाई कोर्ट जबलपुर में आरोपी अक्षय तातेड़ की ओर से अधिवक्ता भारत सेन और संजय चौरसे ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 528 के तहत याचिका दाखिल की है।
50 लाख की वसूली पर कोर्ट ने किया विचार
परिवादी पक्ष के मुताबिक, आरोपी से हाथ उधारी के इकरारनामे के आधार पर रकम वसूली का प्रयास किया गया। परंतु आरोपी पक्ष ने आयकर कानून के तहत इस वसूली की वैधता को चुनौती दी। अदालत में यह प्रश्न खड़ा हुआ कि एक ही धनराशि आयकर कानून के तहत अवैध और चेक बाउंस कानून के तहत वैध कैसे हो सकती है।
हाई कोर्ट का अहम आदेश
हाई कोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी बैतूल सुरेश यादव की अदालत में चल रही सुनवाई पर रोक लगा दी। अदालत का मानना है कि बेहिसाब धन की वसूली को कानूनी आधार पर परखने की आवश्यकता है।
परिवादियों और आरोपियों के तर्क
परिवादी महेश आहूजा, मुकेश आहूजा, सुरेश आहूजा, किरण आहूजा और रोशनी आहूजा ने दावा किया कि आरोपी अक्षय तातेड़ ने 50 लाख रुपए की उधारी ली थी, जिसके लिए चेक जारी किए गए थे। चेक बाउंस होने के बाद यह परिवाद दर्ज किया गया।
आरोपी का पक्ष
अक्षय तातेड़ के अधिवक्ता गण का कहना है कि यह लेनदेन आयकर विवरणी में घोषित नहीं था और इसे काले धन के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है। बचाव पक्ष लेनदेन से इनकार कर रहा है, लेनदेन हुआ नहीं है, चेक के दुरुपयोग का मामला है।
