Betul News:ठेका लिया बड़ा महंगा इस लिए रेट में नहीं होगा समझौता
ठेका लिया बड़ा महंगा इस लिए रेट में नहीं होगा समझौता

बैतूल। शराब दुकानों के ठेके सिंडिकेट के हाथों पहुंचते ही मनमानी का खेल कुछ इस तरह खेला जा रहा है कि, अपने आपको ईमानदार बतलाने वाले अधिकारी भी कुछ नहीं कर पा रहे है। जबकि ठेकेदार ने नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए राजेन्द्र वार्ड में आंगन वाड़ी के समीप शराब दुकान खोल रखी है। वही एक और शहर में सुरा प्रेमियों को अगर शराब पीना है तो लाजमी है महंगी ही खरीद कर पीना पड़ेगा क्यों कि शहर में चौक चौराहों पर चर्चा जोरो से चल रही है जहां लोगों की मन की बात दबे जुबां से बाहर निकल कर आ रही है कहा जाता है कि रसूख का ठेका बड़ा महंगा है इस लिए रेट से समझौता नहीं किया जाएगा क्यों कि और तो और शहर मुख्यालय पर जहां शराब दुकान महज 6 होती थी ठेके बदले के बाद 8 दुकान हो गई है दो दुकान को बड़ा जो लिया है! वैसे रंजीत के आगे प्रशासन कही बोना तो नजर नहीं आ रहा या हो सकता है कि अपनी आंखों में लिफ़मे का चश्मा लगाने से कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा होगा! मानते हैं कि लिफाफे हर शराब ठेकेदार देता है लेकिन क्या उस लफ़ाफ़े के आगे उन गरीब बच्चों के बारे में सोचो जिनके मां बाप दिन भर मजदूरी करते हैं और अपने बच्चों का पेट पाल रहे हैं जहां उनके छोटे बच्चे आंगनवाड़ी में सीखने जाते हैं। लेकिन अगर शराब दुकान हटाई नहीं जा रही। एक और सरकार द्वारा बच्चों को अच्छी शिक्षा देनी की बात करती हैं तो वही बैतूल में प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी पलीता लगाने में पीछे नहीं हट रहे इसका जीता जागता उदाहरण राजेंद्र वार्ड की शराब दुकान को देख कर ही अंदाजा लगाया जा सकता है वही लोगों का कहना है कि अब राजेन्द्र वार्ड में बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्र में शिक्षा नहीं शराब पीना सिखाएंगे क्या? ऐसा हम नहीं वहां के लोगों का कहना है! क्षेत्रवासियों ने जनसुनवाई सहित एड़ी चोटी का जोर लगा दिया लेकिन न प्रशानिक अधिकारी इसमें रुचि दिखा रहे और न आबकारी अधिकारी। मतलब साफ है कि करोड़ो कमाने के चक्कर मे लाखो खर्च भी हो जाएं तो ठेकेदार घाटे में नहीं रहेगा। जिला प्रशासन के लिए इससे ज्यादा शर्म की बात और क्या हो सकती है कि ठेकेदार द्वारा रखे गए वजन के नीचे अधिकारी इस कदर दबा दिए गए हैं कि उन्हें न ही नियमों की चिंता है और न ही आंगनवाड़ी में पढ़ने वाले छोटे छोटे बच्चों के भविष्य की। शराब रसूख ठेकेदार की माया ने आंगनवाड़ी में आने वाली गर्भवती महिलाओं की गरिमा तक को ताक पर रखने के लिए मजबूर कर दिया है।क्यों कि शराब दुकान हटाई नहीं जा रही है!
