Betul News:बैतूल में दिग्गज नेताओं की मौजूदगी के बावजूद भ्रष्टाचार में नंबर वन!

गांव-शहर सभी चपेट में, जिम्मेदार मौन और कुछ चंद मीडिया का भी बिकाऊ चेहरा उजागर

बैतूल में दिग्गज नेताओं की मौजूदगी के बावजूद भ्रष्टाचार में नंबर वन!

गांव-शहर सभी चपेट में, जिम्मेदार मौन और कुछ चंद मीडिया का भी बिकाऊ चेहरा उजागर

 

बैतूल जिले में शासन-प्रशासन और नेताओं की गहरी जड़ें होने के बावजूद भ्रष्टाचार की जड़ें और भी गहरी होती जा रही हैं। चाहे वह शहर हो या सुदूर ग्राम पंचायत – हर स्तर पर लूट, अनियमितता और गैर-जिम्मेदाराना रवैया आम हो गया है। बिना निर्माण के निकल जाती है राशि, ग्राम पंचायतों में खुलेआम लूट ग्रामीण इलाकों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है ना सड़कें ठीक, ना नालियां, ना शुद्ध पेयजल व्यवस्था। ग्राम पंचायतों में जो राशि निर्माण कार्य के लिए स्वीकृत होती है, वह राशि कागजों में ही खर्च हो जाती है, ज़मीनी हकीकत में निर्माण तक नहीं होता। इस राशि की बंदरबांट में निचले स्तर से लेकर उच्च पदस्थ अधिकारी तक शामिल बताए जा रहे हैं। यही कारण है कि बिना निर्माण के भी राशि निकाल ली जाती है और कोई पूछने वाला नहीं होता। अगर कोई जागरूक नागरिक या पत्रकार इस भ्रष्टाचार की शिकायत करता है, तो न तो जिम्मेदार अधिकारी संज्ञान लेते हैं और न ही कोई जांच होती है। उल्टा कुछ बिकाऊ और बेईमान कुछ चंद उन्हीं के खिलाफ झूठी खबरें छापने लगते हैं, जो आवाज़ उठाते हैं।ये मीडिया संस्थान खुद को ईमानदार बताकर जनहित की आड़ में भ्रष्टाचारियों के प्रवक्ता बन गए हैं। और ये ही कारण है कि डोक्या पंचायत से लेकर आठनेर और भीमपुर जनपद पंचायतों तक भ्रष्टाचारियों के हौसले बुलंद हैं।

फोटो में दिखी हकीकत कहीं अधूरे निर्माण, कहीं कागजों में ही पूरे

चार अलग-अलग ग्राम पंचायतों की तस्वीरें यह साबित करने के लिए काफी हैं कि जिन जगहों पर लाखों रुपये की राशि स्वीकृत हुई, वहां या तो निर्माण अधूरा है या फिर केवल कागजों पर ही पूरा कर दिया गया है। डोक्या पंचायत इसका ताजा उदाहरण है, जहां खुला भ्रष्टाचार सामने आया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सवाल यह उठता है कि जब फोटो, प्रमाण और शिकायतें सब कुछ सामने है तो जिम्मेदार अधिकारी चुप क्यों हैं?

तेजतर्रार छवि के अधिकारी भी चुप! क्यों नहीं हो रही कार्रवाई?

बैतूल जिले में कई ऐसे उच्च पदस्थ अधिकारी पदस्थ हैं जिनकी छवि तेज और निष्पक्ष मानी जाती है। लेकिन इन ग्राम स्तरीय और जनपद पंचायतों में हो रहे खुले भ्रष्टाचार के बावजूद उनकी चुप्पी सवालों के घेरे में है। क्या ये चुप्पी मिलीभगत का संकेत है, या फिर ऊपरी दबाव के चलते आंखें मूंद ली गई हैं?

जनता के सवाल, जिनका जवाब ज़रूरी है

1. जब डोक्या जैसे गांवों में खुलेआम भ्रष्टाचार के प्रमाण हैं तो अभी तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं?

2. जिन अधिकारियों के पास जांच और कार्रवाई की शक्ति है, वे मूकदर्शक क्यों बने हुए हैं?

3 क्या बैतूल के तेजतर्रार प्रशासनिक अधिकारियों की छवि सिर्फ कागजों तक सीमित है?

यदि अब भी कार्रवाई नहीं हुई तो यह मानना पड़ेगा कि बैतूल जिले में भ्रष्टाचार ही शासन का स्थायी चेहरा बन चुका है – जिसमें नेताओं से लेकर मीडिया और अफसरशाही तक की चुप्पी सह-भागीदार है।

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