Betul News:काम कागजों में चमक रहा है,ज़मीन पर झूठ बिखरा है! डोक्य पंचायत घोटाले में सरपंच सचिव ओर ठेकेदार की शर्मनाक कोशिश!
लाखों रुपये का निर्माण कार्य केवल कागज़ों में सच उजागर होने पर ठेकेदार ने प्रलोभन' देकर खबर दबाने की कोशिश की! प्रशासन की चुप्पी अब सवालों के घेरे में!
काम कागजों में चमक रहा है,ज़मीन पर झूठ बिखरा है! डोक्य पंचायत घोटाले में सरपंच सचिव ओर ठेकेदार की शर्मनाक कोशिश!
लाखों रुपये का निर्माण कार्य केवल कागज़ों में सच उजागर होने पर ठेकेदार ने प्रलोभन’ देकर खबर दबाने की कोशिश की! प्रशासन की चुप्पी अब सवालों के घेरे में!

बैतूल जिले की ग्राम पंचायत डोक्य के अंतर्गत ग्राम मेढा में पूर्व में चलाई गई खबर और शिकायत को बंद करने की कोशिश ने उजागर कर दिया है कि ग्राम स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार की परतें किस तरह फैली हुई हैं। सरपंच, सचिव और ठेकेदार की मिलीभगत से लाखों रुपये का सरकारी फंड खर्च दिखा दिया गया, जबकि मौके पर किसी तरह का निर्माण कार्य नजर ही नहीं आया।
यह है पूरा मामला?
ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड के अनुसार, निर्मल सोमा के घर से गुलाब के घर तक सीसी रोड (कांक्रीट सड़क) का निर्माण कार्य पूर्ण बताया गया है। मगर जब टीम ने मौके का मुआयना किया, तो वहां कच्चा रास्ता तक नहीं मिला। न सड़क, न मटेरियल, न निर्माण की कोई निशानी।ग्रामीणों से पूछने पर जवाब मिला, “यहाँ तो आज तक कोई सड़क बनी ही नहीं, बस नाम है।” ग्रामीण इस बात से अनजान थे कि उनके नाम पर लाखों की राशि खर्च दिखा दी गई है।
तालाब बना ‘किस्से’ में, हकीकत में न खुदाई न निर्माण
रिकॉर्ड में दर्ज है कि किसान तुकाराम के खेत पर तालाब निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। लेकिन जब पत्रकारों ने तुकाराम से बात की, तो उन्होंने कहा मेरे खेत में किसी भी प्रकार की खुदाई या तालाब निर्माण नहीं हुआ है। मैं खुद खेती करता हूँ, मुझे सबसे पहले पता चलता अगर कोई कार्य होता अब बड़ा सवाल यह है कि जब कार्य नहीं हुए, तो भुगतान किस आधार पर और किसके आदेश से किया गया? स्थानीय स्तर पर अनोखा सच द्वारा की गई ग्राउंड रिपोर्टिंग के मुताबिक, ग्राम मेढा में जिन निर्माण कार्यों को ‘पूरा’ दिखाकर भुगतान कर दिया गया, वे वास्तव में कभी शुरू ही नहीं हुए। यही नहीं, जब यह सच्चाई उजागर की गई तो संबंधित पक्षों की ओर से खबर को रोकने की गैरकानूनी और अनैतिक कोशिशें शुरू हो गईं। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जब पत्रकारों ने इन तथ्यों को उजागर करना शुरू किया, तो ठेकेदार ने सीधे संपर्क कर ‘समझौते’ के लिए प्रस्ताव रखा। उसने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि शिकायत वापस लेलो और खबर रोक दो तो वह सहयोग करने को तैयार है। अगर कार्य पूरी तरह पारदर्शी और सही थे, तो खबर से डर क्यों? क्या डर इस बात का है कि सच सामने आने पर ऊपर तक बात पहुंच सकती है?और क्या प्रशासन की चुप्पी इस पूरे भ्रष्टाचार की मौन सहमति है?
प्रशासन ने अब तक आंखें मूंदी क्यों?
अनोखा सच ने पूरे मामले की लिखित शिकायत के साथ फोटो-वीडियो प्रमाण भी जिला कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ को सौंपे। लेकिन एक महीने से भी ज़्यादा समय बीत जाने के बाद न तो किसी तरह की जांच शुरू हुई, न कोई कार्रवाई हुई।सच अगर बोलता है, तो डर उन्हीं को लगता है जो झूठ पर टिका शासन चला रहे हैं!
