Betul News:जिंदा होते हुए भी ‘मृत!दो साल से ख़ुद को जिन्दा साबित करने के लिए सरकारी दफ्तरों में भटक रही कांता बाई पंचायत की घोर लापरवाही उजागर
जिंदा होते हुए भी ‘मृत!दो साल से ख़ुद को जिन्दा साबित करने के लिए सरकारी दफ्तरों में भटक रही कांता बाई पंचायत की घोर लापरवाही उजागर

आठनेर। सोचिए! अगर आप जिंदा हों और सरकार के कागज़ों में ‘मृत’ घोषित कर दिए जाएँ, तो आपकी जिंदगी कैसी हो जाएगी? ऐसा ही हुआ बैतूल जिले की आठनेर जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत मानी में। यहां ग्राम रोजगार सहायक भीमराव उइके ने ऐसी गड़बड़ी कर दी जिसने एक गरीब महिला कांता बाई को दो साल तक योजनाओं से वंचित कर दिया।2023 में पंचायत ने उन्हें कागज़ों में मृत बता दिया और उनकी समग्र आईडी डिलीट कर दी। नतीजा यह हुआ कि पति के निधन के बाद जब उन्हें सबसे ज्यादा सहारे की जरूरत थी, तब पेंशन, राशन, आवास योजना और आयुष्मान कार्ड जैसे सभी अधिकार उनसे छीन लिए गए।कांता बाई लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटती रहीं, लेकिन हर बार उनसे नए कागज मांग लिए जाते। आज भी रिकॉर्ड में वह ‘मृत’ ही दर्ज हैं। थक-हारकर उन्होंने जनपद सीईओ आस्था जैन से फरियाद की मैडम अब तो मुझे जिंदा कर दो।मामले का खुलासा होते ही सीईओ ने रोजगार सहायक को कारण बताओ नोटिस थमाया और कांता बाई का नाम जीवित लाभार्थियों की सूची में जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी।लेकिन बड़ा सवाल यह है कि दो साल तक अधिकारियों को इस लापरवाही का पता क्यों नहीं चला? क्या केवल नोटिस थमा देना ही प्रशासन की जिम्मेदारी है?
