Betul News:वादे हुए हवा, रोज़गार हुआ स्वाहा फुटकर व्यापारियों की रोज़ी रोटी पर ‘विकास’ का बुलडोज़र!
वादे हुए हवा, रोज़गार हुआ स्वाहा फुटकर व्यापारियों की रोज़ी रोटी पर ‘विकास’ का बुलडोज़र!

बैतूल।चुनाव से पहले जो मंचों पर ‘जनसेवा’ की गूंज थी, अब वही गलियों में ‘जननिराशा’ की सिसकी बन गई है।विधायक हेमन्त खंडेलवाल ने चुनाव के दौरान जिन वादों की बौछार की थी आज वही वादे धूप में पड़ी पुरानी पोस्टर की तरह फीके और फटे हुए लग रहे हैं।छोटे फुटकर व्यापारी, ठेलेवाले, रेहड़ी-पटरी चलाने वाले वो लोग जिनकी बदौलत हर बाजार में रौनक थी आज अपने ही शहर में बेघर, बेरोज़गार और बेआवाज़ हैं। बैतूल नगर से लेकर आसपास के कस्बों तक अतिक्रमण के नाम पर जो कार्रवाई हुई, उसने सैकड़ों परिवारों को उजाड़ दिया।
बुलडोज़र चले, ठेले टूटे, और उम्मीदें बिखर गईं।तब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने भरोसा दिलाया था आपको नए स्थान पर बसाया जाएगा, किसी का रोजगार नहीं छीना जाएगा।पर अब एक साल से ज़्यादा वक्त बीत चुका है, अब तो माननीय प्रदेश अध्यक्ष भी है उसके बावजूद न नया ठिकाना मिला, न रोज़गार बहाल हुआ।जिन हाथों ने शहर को सजाया, वही हाथ अब बेरोज़गारी में लाचार हैं।नई जगह बसाने की योजना बन रही है” कहकर एक साल काट दिया गया योजना बनी या जनता को भुला दिया गया?अगर अतिक्रमण गलत था, तो पुनर्वास क्यों नहीं हुआ?गरीब का ठेला हटाने में दो घंटे लगे, पर ठिकाना देने में सालभर भी कम पड़ गया!विधायक से लेकर प्रशासन तक कोई जवाब देने को तैयार नहीं।जनता के हिस्से बस इंतज़ार और ठंडी फाइलें हैं।
