Betul News:झल्लार में लाला का ‘लाखों का जुआ साम्राज्य 12 साल से पुलिस की पकड़ से बाहर मुख्य सरगना, लग्ज़री गाड़ियों में पहुंचते खिलाड़ी
झल्लार में लाला का ‘लाखों का जुआ साम्राज्य 12 साल से पुलिस की पकड़ से बाहर मुख्य सरगना, लग्ज़री गाड़ियों में पहुंचते खिलाड़ी

झल्लार थाना क्षेत्र के झल्लार और हीड़ली गांवों के बीच इन दिनों लाखों रुपए के जुए की फड़ खुलेआम संचालित हो रही हैं। बताया जा रहा है कि यह पूरा खेल एक पुराने जुआ सरगना ‘लाला’ के इशारों पर चल रहा है, जो पिछले 12 से 15 सालों से इस अवैध कारोबार में सक्रिय है। जिलेभर में इसकी चर्चा है, मगर थाना प्रभारी को इस सब की भनक नहीं लगती क्या स्थानीय सूत्रों का कहना है कि लाला का नाम सुनते ही आसपास के जुआरियों में एक अलग रौब दिखता है। यह व्यक्ति आठनेर, झल्लार और अब महाराष्ट्र सीमा तक अपनी जुए की जड़ें फैला चुका है। खास बात यह कि हर बार पुलिस कार्रवाई के पहले ही लाला अपने ठिकाने बदल देता है, जिससे वह कभी भी गिरफ्त में नहीं आता सूत्र बाते है कि जहां लाला है, वहीं लाखों का जुआ चलता है।लाला के जुए की फड़ में ‘परमिशन’ का फंडा सबसे चर्चित है। खिलाड़ियों का दावा है कि “जहां लाला बैठता है, वहां सब कुछ परमिशन से होता है।यानी कथित रूप से स्थानीय स्तर पर कुछ रसूखदारों से मिलकर फड़ को सुरक्षा दी जाती है। इसी वजह से पुलिस की मौजूदगी में भी जुए का यह खेल जारी रहता है।बैतूल शहर से लेकर परतवाड़ा, मौरसी और वरूण तक के खिलाड़ी लाला की फड़ पर पहुंचते हैं। ये खिलाड़ी महंगी लग्ज़री गाड़ियों में आते हैं और एक दांव में हजारों से लेकर लाखों रुपए तक लगा देते हैं।लाला न केवल इन खिलाड़ियों को दांव लगाने का मौका देता है, बल्कि हारने वालों को “लालच” देकर और गहराई में फंसाने का भी काम करता है। यही वजह है कि उसके इर्द-गिर्द एक संगठित जाल तैयार हो चुका है।पूरे जिले में इस फड़ की चर्चा है, लेकिन अब तक झल्लार थाना पुलिस की कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।चर्चा है कि अगर इतनी बड़ी फड़ चल रही है तो थाना क्षेत्र के अधिकारियों को इसकी खबर क्यों नहीं?क्या लाला की पुरानी ‘सेटिंग’ अब भी काम कर रही है?या फिर यह मामला कहीं न कहीं संरक्षण की बू देता है?
