Education News :शिक्षा के मंदिर में बढ़ती महंगी फीस से स्कूल के छात्रों में नशा करने का प्रतिशत तेजी बढ़ रहा है?
गरीबी रेखा के नीचे नहीं आने वाले परिवार के बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ना नहीं चाहते और परिजन फीस भरने में असमर्थ हो रहे हैं .. ऐसे में करे तो आखिर करें.. सुट्टा मार नशा ही नशा है।
शिक्षा के मंदिर में बढ़ती महंगी फीस से स्कूल के छात्रों में नशा करने का प्रतिशत तेजी बढ़ रहा है?
गरीबी रेखा के नीचे नहीं आने वाले परिवार के बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ना नहीं चाहते और परिजन फीस भरने में असमर्थ हो रहे हैं .. ऐसे में करे तो आखिर करें.. सुट्टा मार नशा ही नशा है।

बात हकीकत की सरकारी स्कूल बंद होने की कगार पर और इधर गरीब परिवार जो गरीबी रेखा के नीचे नहीं आते उनके लिए निजी स्कूलों में अपने बच्चों को शिक्षा दिलवाना कितना मुश्किल हो सकता है। ये बात उन सरकारी स्कूल के टीचर और उन प्राइवेट स्कूल संचालको समझने की जरूरत है। जिनके बच्चों बेहतर शिक्षा मिल रही है। क्योंकि उनके आसान इसलिए है कि सरकारी स्कूल भले ही बंद होने की कगार पर है या फिर एक ही हाल में अन्य क्लास के बच्चे कम संख्या में एक साथ पढ़ते है । और प्राइवेट स्कूल संचालक सुविधाएं के नाम पर अच्छी खासी फीस वसूल लेते हैं। जिनसे उनके बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलवाना आसान हो जाता है। हम ऐसा मान सकते हैं। वहीं समाज में इसका दूसरा पहलू भी सामने है। जो देश की नई युवा पीढ़ी को लेकर परिजन चिंतित है। जिसका मुख्य कारण प्रायवेट स्कूल की साल भर की फीस से सस्ता बहुत है ..ये नशा जिसकी लत स्कूलों की महंगी फीस ने गरीब परिवार के बच्चों को पढ़ाई से दूर किया है । आज अगर हम अपने आस पास देखे तो मध्यम वर्ग अपनी आय के अनुसार परिवार का पालन पोषण करने के साथ बच्चों को शिक्षा दिलाने में असमर्थ हो रहे है। जिससे अधिक प्रतिशत में छात्रों को नशे का आदि बना दिया है.. बड़े महानगरों की यही वास्तविकता है। जिसकी तर्ज पर कही न कहीं बैतूल भी तेज गति से आगे बढ़ रहा है। आने वाले समय में शिक्षा कि तुलना में अधिक या बराबर प्रतिशत नशा का होगा। ?? इस बात को गंभीरता से लेना आज जरूरी है। क्योंकि देखने में आता है कि स्कूलों के ऐसे जिनकी फीस समय पर जमा नहीं होने के कारण स्कूल में टीचर के द्वारा इंसल्ट किया जाता है। कही उन्हें खरी खोटी सुनाई जाती है। जिससे तंगा कर छात्र और छात्राएं नगर की होटल टी स्टॉल या फिर सुट्टा बार जैसी जगहों पर चाय सिगरेट पीती नजर आ सकती है। जो नशे का भी शिकार हो रही है। और स्थिति से परेशान कुछ प्रतिशत में बड़ी कक्षाओं में पढ़ाई का खर्च उन्हें मानसिक तनाव देता है। मै किसी भी निजी स्कूल संस्था इशारा बिल्कुल नहीं कर रहा। बस यह ख सकता हूं कि सरकारी स्कूल में अध्यापक अच्छे टीचर है। सरकार सुविधाएं भी उपलब्ध करवाएं स्कूलों का प्रचार प्रसार प्राथमिकता से करें। ताकि बच्चों की शिक्षा आसान हो जिसके लिए परिजन भी इस बात पर विचार करें। बच्चों बेहतर शिक्षा और सही दिशा हो भारत को नशा मुक्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका होगी। प्राइवेट स्कूल संचालक भी अभियान में सुविधा और वाजिब फीस लेकर नशा मुक्त भारत बनाने में सहयोग करने में सक्षम है। कहने का मतलब साफ है। शिक्षा से नशा को दूर रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
