Betul News:सच नहीं लिख सकते तो किसी को बदनाम भी मत करो, पत्रकारिता का स्तर मत गिराओ
सच नहीं लिख सकते तो किसी को बदनाम भी मत करो, पत्रकारिता का स्तर मत गिराओ

पत्रकारिता लोकतंत्र का वह स्तंभ है जिस पर जनता भरोसा करती है। लोग समाचार इसलिए पढ़ते और देखते हैं क्योंकि उन्हें उम्मीद होती है कि उनके सामने तथ्य रखे जाएंगे, न कि किसी व्यक्ति या संस्था के प्रति पूर्वाग्रह। लेकिन हाल के वर्षों में खबर और प्रचार, तथ्य और आरोप, पत्रकारिता और व्यक्तिगत एजेंडे के बीच की रेखा धुंधली होती दिखाई दे रही है।किसी भी व्यक्ति पर सवाल उठाना, उसके कार्यों की समीक्षा करना और जनहित से जुड़े मुद्दों को सामने लाना पत्रकारिता का कर्तव्य है। लेकिन बिना पर्याप्त तथ्यों, बिना प्रमाण और बिना दूसरे पक्ष को सुने किसी की छवि खराब करने का प्रयास पत्रकारिता नहीं कहा जा सकता। अभी कुछ समय से एक अखबार निकलता है कोई कोना उसमें किसी की भी छवि धूमिल करने का जैसे पैटर्न ही बना लिया कभी किसी पुलिस विभाग की छवि बिगाड़ना तो कभी किसी राजनेता की छवि बिगाड़ना तो जो मन में आया लिख देना और अब तो हद ही कर दी एक सच्चे ईमानदार निष्पक्ष पत्रकारिता पर ही सवाल उठाने लग गया। ऐसी पत्रकारिता नहीं की जाती है।यह केवल सनसनी फैलाने और लोगों को भ्रमित करने का माध्यम मत बनाओ!आलोचना और बदनाम करने में बहुत बड़ा अंतर होता है। आलोचना तथ्यों पर आधारित होती है और सुधार का रास्ता दिखाती है, जबकि बदनाम करने की कोशिश केवल किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का काम करती है। एक जिम्मेदार पत्रकार का उद्देश्य सच को सामने लाना होना चाहिए, न कि किसी को निशाना बनाना।समाज में पत्रकारिता की गरिमा तभी बनी रह सकती है जब निष्पक्षता, सत्यता और जवाबदेही उसके मूल सिद्धांत बने रहें। यदि किसी विषय में पर्याप्त तथ्य उपलब्ध नहीं हैं, तो संयम रखना बेहतर है बजाय इसके कि अधूरी जानकारी के आधार पर किसी की छवि धूमिल कर दी जाए।सच्ची पत्रकारिता वही है जो सत्ता से सवाल पूछे, जनता की आवाज बने और तथ्यों के साथ खड़ी रहे। यदि सच लिखने का साहस नहीं है, तो कम से कम झूठ और अफवाहों के सहारे किसी को बदनाम करने का प्रयास भी नहीं होना चाहिए। पत्रकारिता की ताकत उसकी विश्वसनीयता में है, और यही उसकी सबसे बड़ी पूंजी है।
अनोखा सच दिखाना हमारी पहचान
