Betul News:साहब का शहर प्रेम गजब! तबादला हुआ, लेकिन जाने का मन नहीं

साहब का शहर प्रेम गजब! तबादला हुआ, लेकिन जाने का मन नहीं

आदेश भोपाल से आया, पर दिल अब भी बैतूल में अटका गलियारों में चर्चा साहब की विदाई आखिर कब?

बैतूल। कहते हैं कि नौकरी में तबादला एक सामान्य प्रक्रिया होती है। आदेश आता है, सामान बंधता है और अधिकारी नई जिम्मेदारी संभालने रवाना हो जाते हैं। लेकिन जिले के एक साहब ने इस परंपरा को मानो नई परिभाषा दे दी है। तबादले के आदेश आए काफी समय हो चुका है, मगर साहब का शहर से मोह खत्म होने का नाम नहीं ले रहा।प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि साहब का बैतूल से लगाव इतना गहरा हो गया है कि जब पिछली बार इनका ट्रांसफर बैतूल हुआ था तो आदेश होने के दूसरे दिन बैतूल पहुंच गए थे ओर चार्ज लेने के लिए बेताब थे खैर अब जब बैतूल से बाहर हुआ तो साहब अब आदेश के 7 दिन बात भी रिलीव नहीं हो रहे अब ऐसा लग रहा है कि साहब रुकवाने की कोशिश करने में लगे हैं लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अब साहब बैतूल में रुख नहीं पाएगे खैर जो भी हो लेकिन आप जनता चुटकी लेते हुए बोल रहे हैं कि साहब की विदाई की हर संभावित तारीख आगे खिसकती नजर आ रही है। लोग मजाक में कहने लगे हैं कि शायद तबादला आदेश तो दूसरे जिले का है, लेकिन दिल का मुख्यालय अब भी बैतूल ही बना हुआ है।शहर में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। कोई कह रहा है कि साहब को यहां की आबोहवा रास आ गई है, तो कोई लाखों का हिसाब है। कैसे छोड़कर जायगे कुछ लोग तो चुटकी लेते हुए यह भी पूछ रहे हैं कि आखिर साहब की रवानगी के लिए अलग से कोई शुभ मुहूर्त निकाला जा रहा है क्या?दिलचस्प बात यह है कि आदेश कागजों पर आगे बढ़ चुका है, लेकिन साहब की विदाई अब भी चर्चाओं में ही अटकी हुई है। ऐसे में लोगों की निगाहें इस सवाल पर टिकी हैं कि आखिर पहले क्या होगा साहब का शहर से मोह भंग या फिर नई पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण?फिलहाल, बैतूल के गलियारों में यही चर्चा है कि साहब का तबादला तो हो गया, लेकिन उनका मन अब भी यहीं पदस्थ बना हुआ है।

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.